
देश की सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों ने साल 2026 में अमेरिका से लिक्विड पेट्रोलियम गैस (LPG) इंपोर्ट करने के लिए एक साल का समझौता किया है। इस कदम को अमेरिका के साथ भारत के ट्रेड सरप्लस को कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। ये मुद्दा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा है और इसी कारण उन्होंने अमेरिका में प्रवेश करने वाले भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है। सोमवार को जारी आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘‘भारत की पब्लिक सेक्टर की पेट्रोलियम कंपनियों ने कॉन्ट्रैक्ट ईयर 2026 के लिए यूएस गल्फ कोस्ट से लगभग 22 लाख टन एलपीजी इंपोर्ट करने के लिए एक साल का संरचित अनुबंध सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।’’
अमेरिका से पहली बार एलपीजी इंपोर्ट करेगा भारत
22 लाख टन एलपीजी भारत के सालाना एलपीजी आयात का लगभग 10 प्रतिशत है और ये भारतीय बाजार के लिए पहला ऐसा अमेरिकी एलपीजी कॉन्ट्रैक्ट है। देश की सरकारी पेट्रोलियम कंपनियां- इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम साल 2026 में लगभग 48 विशाल गैस वाहक जहाजों के बराबर एलपीजी आयात करेंगी। अमेरिकी कंपनियां- शेवरॉन, फिलिप्स और टोटलएनर्जीज ट्रेडिंग एसए भारतीय कंपनियों को एलपीजी गैस की सप्लाई करेंगी। भारत ने पिछले कुछ महीनों से जारी द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के तहत अमेरिका से ऊर्जा आयात बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है।
अमेरिका से 8 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है भारत
वर्तमान में भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 8 प्रतिशत अमेरिका से खरीदता है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक्स पर इस एलपीजी समझौते की घोषणा की। उन्होंने कहा, ‘‘ऐतिहासिक शुरुआत! दुनिया के सबसे बड़े और सबसे तेजी से बढ़ते एलपीजी बाजारों में से एक अब अमेरिका के लिए खुल रहा है। भारत के लोगों को सुरक्षित और सस्ती एलपीजी उपलब्ध कराने की हमारी कोशिशों के तहत हम एलपीजी आपूर्ति स्रोतों में विविधता ला रहे हैं। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में साल 2026 के लिए लगभग 22 लाख टन अमेरिकी गल्फ कोस्ट से एलपीजी आयात करने का एक साल का कॉन्ट्रैक्ट पूरा किया है, जो भारतीय बाजार के लिए अमेरिकी एलपीजी का पहला कॉन्ट्रैक्ट है।”





































