
मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारतीय रसोई तक पहुंचता दिख रहा है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका ने घरेलू तेल-तिलहन बाजार में हलचल मचा दी है। शनिवार को देशभर के बाजारों में लगभग सभी प्रमुख तेल और तिलहनों के दाम मजबूती के साथ बंद हुए। कारोबारियों का कहना है कि सप्लाई बाधित होने के डर से बाजार में अचानक खरीदारी बढ़ी, जिससे कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला।
बाजार सूत्रों के मुताबिक, होली से पहले व्यापारिक गतिविधियां पहले ही धीमी चल रही थीं और त्योहार के लिए जरूरी खरीदारी लगभग पूरी हो चुकी थी। ऐसे में बाजार सामान्य स्थिति में था। लेकिन ईरान पर हमले की खबर के बाद आपूर्ति संकट की आशंका ने माहौल बदल दिया। आयातित तेलों की उपलब्धता पर असर पड़ने की संभावना से व्यापारियों में अफरा-तफरी मच गई और दाम ऊपर चढ़ गए।
किसानों की आवक घटी, मिलों ने बढ़ाए दाम
कम कीमतों के चलते किसानों ने सरसों की आवक घटा दी थी। इस बीच कच्ची घानी की बड़ी तेल मिलों ने सरसों के दाम में 150 रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी कर दी। इन कारणों से सरसों तिलहन 6,475-6,500 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। सरसों तेल दादरी 13,450 रुपये प्रति क्विंटल और कच्ची घानी 2,285-2,430 रुपये प्रति टिन के स्तर पर बंद हुई।
आयात शुल्क मूल्य बढ़ने से और दबाव
सरकार ने भी देर रात आयातित खाद्य तेलों के आयात शुल्क मूल्य में बढ़ोतरी की घोषणा की। कच्चे पामतेल (सीपीओ) पर 26 रुपये प्रति क्विंटल, पामोलीन पर 124 रुपये और सोयाबीन डीगम पर 15 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। इससे आयात महंगा होगा और घरेलू बाजार में कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है।
अन्य तेल-तिलहनों में भी तेजी
मूंगफली 7,000-7,475 रुपये प्रति क्विंटल, सोयाबीन दाना 5,350-5,400 रुपये और सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली 14,450 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। कांडला में सीपीओ 11,775 रुपये और पामोलिन आरबीडी दिल्ली 13,600 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।






































