
यूएई, खासकर दुबई का प्रॉपर्टी मार्केट लंबे समय से अपनी तेज रफ्तार, लग्जरी और आकर्षक रिटर्न्स के लिए दुनिया भर के निवेशकों को लुभाता रहा है। लेकिन अब यह बाजार एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है, जहां डिजिटल तकनीक, डेटा एनालिटिक्स, प्रॉपटेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ने पारंपरिक तरीकों को लगभग खत्म कर दिया है। अब निवेशक घर बैठे ही पूरी प्रक्रिया को संभाल सकते हैं-बिना किसी ब्रोकर की बातों पर अंधभरोसा किए या साइट विजिट के चक्कर काटे।
ट्रांजैक्शन भी हो रहे डिजिटल
लेन-देन भी लगभग पूरी तरह डिजिटल ही हो रहे हैं। दुबई लैंड डिपार्टमेंट (डीएलडी) ने कई प्लेटफॉर्म्स जैसे Dubai REST, Dubai Now ऐप और Oqood पोर्टल लॉन्च किए हैं, जिनके जरिए प्रॉपर्टी की ओनरशिप चेक करना, सौदा रजिस्टर करना और यहां तक कि पूरी डील फाइनल करना संभव हो गया है। हाल के आंकड़े बताते हैं कि दुबई में अधिकांश रियल एस्टेट ट्रांजैक्शंस अब डिजिटल तरीके से हो रहे हैं, कई रिपोर्ट्स में 90% से ज्यादा डील्स का जिक्र आता है। इससे न सिर्फ समय की भारी बचत होती है, बल्कि फ्रॉड और धोखाधड़ी का खतरा भी लगभग खत्म हो जाता है। रिमोट रजिस्ट्रेशन, ई-साइन और इंस्टेंट टाइटल डीड जैसी सुविधाओं ने विदेशी निवेशकों के लिए भी प्रक्रिया को बेहद आसान बना दिया है।
डेटा और रीयल-टाइम इनसाइट्स बने निवेश का आधार
पहले निवेशक ब्रोकर की जानकारी या पुराने ट्रेंड्स पर निर्भर रहते थे, लेकिन अब डिजिटल डैशबोर्ड्स और AI-पावर्ड टूल्स हर इलाके का लाइव डेटा देते हैं-मांग-आपूर्ति, प्राइस ट्रेंड्स, फ्यूचर प्रोजेक्ट्स और यहां तक कि किराए की संभावित कमाई। यूएई में औसत ग्रॉस रेंटल यील्ड 2026 में लगभग 6% के आसपास है (कुछ अफोर्डेबल एरियाज में 7-8.5% तक), जबकि अपार्टमेंट्स में यह और भी बेहतर हो सकता है। निवेशक अब डेटा के आधार पर फैसला लेते हैं कि कहां निवेश करना ज्यादा फायदेमंद होगा-जैसे JVC, International City या प्राइम लोकेशन्स में हाई डिमांड वाले इलाके।
प्रॉपटेक और AI ने क्रांति ला दी
प्रॉपटेक का तेज विकास यूएई में साफ दिख रहा है—मार्केट 2025 में करीब 717 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2026 में 837 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। AI टूल्स हजारों डेटा पॉइंट्स का विश्लेषण करके प्रॉपर्टी की सटीक वैल्यूएशन देते हैं, मार्केट ट्रेंड्स की भविष्यवाणी करते हैं और निवेशक की जरूरतों (बजट, लोकेशन, रिटर्न) के मुताबिक परफेक्ट मैच सुझाते हैं। वर्चुअल टूर्स, डिजिटल ट्विन्स और प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स ने खासकर विदेशी खरीदारों के लिए प्रोजेक्ट्स को घर बैठे “देखने” और समझने लायक बना दिया है। साथ ही, रियल एस्टेट टोकनाइजेशन के पायलट प्रोजेक्ट्स (जैसे 2026 में शुरू होने वाले सेकंडरी मार्केट रिसेल रूल्स) से फ्रैक्शनल ओनरशिप और ज्यादा लिक्विडिटी आ रही है।







































