
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को उद्योग जगत से निवेश और नवाचार के साथ आगे आने का आग्रह किया। उन्होंने वित्तीय संस्थानों से व्यावहारिक समाधान प्रदान करने और बाजार विश्वास को मजबूत करने में सहयोग देने की भी अपील की। ‘विकसित भारत के लिए टेक्नोलॉजी, सुधार और वित्त’ विषय पर बजट के बाद आयोजित ‘वेबिनार’ को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जब सरकार, उद्योग और ज्ञान क्षेत्र से जुड़े लोग एक साथ आते हैं, तो सुधार परिणामों में परिवर्तित होते हैं और कागज पर की गई घोषणाएं जमीनी स्तर पर उपलब्धियों में तब्दील होती हैं।
सरकार ने इंफ्रा पर दिया जोर
पीएम मोदी ने कहा कि सरकार ने पिछले एक दशक में इंफ्रा पर जोर दिया है। सार्वजनिक पूंजीगत व्यय 11 साल पहले दो लाख करोड़ रुपये था, जो केंद्रीय बजट 2026-27 में बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ये उच्च पूंजीगत व्यय आवंटन प्राइवेट सेक्टर के लिए नए उत्साह के साथ आगे आने का संकेत है। उन्होंने उद्योग से 2026-27 के बजट की सभी घोषणाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया।
भारत ने पिछले 1 दशक में दिखाई असाधारण मजबूती
प्रधानमंत्री ने कहा, ”भारतीय कंपनियों को नए निवेश एवं नवाचार के साथ आगे आना चाहिए। वित्तीय संस्थानों को व्यावहारिक समाधान तैयार करने और बाजार विश्वास बढ़ाने में सहयोग देना चाहिए।” प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले दशक में भारत ने असाधारण मजबूती प्रदर्शित की है। ये संयोग से नहीं बल्कि दृढ़ विश्वास-आधारित सुधारों के कारण संभव हुआ है। सरकार ने प्रक्रियाओं को भी आसान बनाया है और कारोबार सुगमता को काफी आसान किया है।
पीएम मोदी ने दिया स्पष्ट ‘रिफॉर्म पार्टनरशिप चार्टर’ विकसित करने का सुझाव
उन्होंने सुझाव दिया, ”हमें एक स्पष्ट ‘रिफॉर्म पार्टनरशिप चार्टर’ विकसित करना चाहिए जिसमें सरकार, उद्योग, वित्तीय संस्थानों और शिक्षाविदों के बीच सहयोग हो। ये चार्टर 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होगा।” बजट का मूल्यांकन अक्सर अलग-अलग मानकों पर किए जाने का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा, ”राष्ट्रीय बजट कोई अल्पकालिक व्यापारिक दस्तावेज नहीं है। ये एक नीतिगत खाका है। इसलिए बजट की प्रभावशीलता का आकलन भी ठोस एवं सार्थक मानकों पर किया जाना चाहिए।”







































