
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका और यूरोपीय देशों के दबाव के बावजूद भारत ने एक बार फिर अपने ऊर्जा हितों को सर्वोपरि रखते हुए बड़ा कदम उठाया है। देश की सबसे बड़ी रिफाइनिंग कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने दिसंबर महीने के लिए रूस से 5 कार्गो कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) खरीदे हैं। खास बात यह है कि ये सभी खरीद गैर-प्रतिबंधित रूसी कंपनियों से की गई हैं। इस डील के बाद पश्चिमी देशों में हलचल मच गई है, क्योंकि यह कदम भारत की स्वतंत्र ऊर्जा नीति का स्पष्ट संकेत है।
द इकोनॉमिक टाइम्स की एक खबर के अनुसार, इंडियन ऑयल ने करीब 3.5 मिलियन बैरल रूसी तेल खरीदा है, जिसकी डिलीवरी दिसंबर में भारत के पूर्वी बंदरगाह पर होगी। यह डील दुबई ऑयल प्राइस के लगभग समान दर पर हुई है। कंपनी ने उन रूसी कंपनियों से तेल नहीं खरीदा जो अमेरिका या यूरोपीय देशों की पाबंदियों के दायरे में आती हैं।
अमेरिका ने 2 कंपनियों पर लगाया बैन
हाल ही में अमेरिका ने रूस की दो सबसे बड़ी कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर सख्त प्रतिबंध लगाए हैं। इसके बाद कई भारतीय रिफाइनरियों जैसे मेंगलुरु रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL), HPCL-मित्तल एनर्जी लिमिटेड (HMEL) और रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अस्थायी रूप से रूसी तेल खरीदना रोक दिया था। लेकिन IOC ने साफ कर दिया है कि वह केवल उन्हीं सोर्स से तेल खरीदेगी जो अंतरराष्ट्रीय सैंक्शन के अनुरूप हों।
‘रूस से तेल खरीद जारी रखेगी’
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के वित्त प्रमुख अनुज जैन ने कहा कि कंपनी रूस से तेल खरीद जारी रखेगी, बशर्ते कि यह अंतरराष्ट्रीय नियमों के दायरे में हो। इससे पहले, अमेरिकी प्रतिबंधों की घोषणा के बाद IOC ने 7–8 रूसी कार्गो रद्द कर दिए थे, क्योंकि वे प्रतिबंधित कंपनियों की सहयोगी यूनिट से जुड़े थे।
ESPO ग्रेड ऑयल की कीमतों में गिरावट
जानकारों के अनुसार, चीन द्वारा हाल में रूसी तेल की खरीद कम करने के बाद ESPO ग्रेड के तेल की कीमतों में गिरावट आई है, जिससे भारतीय रिफाइनरों के लिए यह डील और अट्रैक्टिव हो गई है। भारत पिछले तीन सालों में रूसी समुद्री कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है। पश्चिमी दबाव के बावजूद यह कदम दिखाता है कि भारत अपने आर्थिक हितों को प्राथमिकता देते हुए ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।





































