
इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा।
बिहार में पहले चरण की 121 सीटों पर नामांकन की समय सीमा शुक्रवार को खत्म हो गई, लेकिन महागठबंधन में अभी तक न सीटों का बंटवारा हुआ है और न सभी सीटों पर उम्मीदवारों के नामों का एलान हुआ है। कांग्रेस और RJD ने अपनी अपनी सीटें तो बांट ली लेकिन मुकेश सहनी को अधर में लटका दिया। मुकेश सहनी की पार्टी को 18 सीटें देने पर सहमति बनी, दस सीटें RJD को अपने कोटे से और आठ सीटें कांग्रेस को अपने कोटे से देनी थी लेकिन दोनों पार्टियों ने मुकेश सहनी को ये नहीं बताया कि उनकी पार्टी को कौन-कौन सी सीटें दी जा रही हैं। इसलिए मुकेश सहनी परेशान हो कर उम्मीदवारों की लिस्ट लेकर घूम रहे हैं। उन्हें ये नहीं पता कि किसको कौन सी सीट से टिकट देना है।
जब मुकेश सहनी ने गठबंधन से अलग होने की धमकी दी तो फिर दिल्ली से लेकर पटना तक हलचल मची। उन्हें मनाने की कोशिशें हुई लेकिन शुक्रवार सुबह तक कोई नतीजा नहीं निकला। दूसरी तरफ NDA में सब कुछ तय हो गया। टिकटों का बंटवारा हो गया है। जेडीयू और बीजेपी 101-101 सीटों पर लड़ेंगे, चिराग पासवान को 29 सीटें मिली है, और उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी को 6-6 सीटें मिली है। अमित शाह बिहार पहुंच गए हैं। शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से 18 मिनट तक बातें की, आपसी समन्वय, साझा रैली और बागियों को काबू में करने पर बात हुई। योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को बिहार के दानापुर और सहरसा में दो रैलियां की।
किसी भी चुनाव में पार्टियों के सामने पहली चुनौती होती है, गठबंधन बनाना। उससे बड़ी चुनौती होती है, alliance partner को सीटों के लिए मनाना और तीसरी चुनौती होती है, बागी उम्मीदवारों को समझाना। NDA ने इस बार इन सारी चुनौतियों को पार कर लिया है। अलांयस में झगड़ा नहीं है, सारी सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान हो गया। टिकट देते समय survey और local feedback का ध्यान रखा गया। जातिगत समीकरण के आधार पर उम्मीदवार तय किए गए। चुनाव का प्रबंध अमित शाह के हाथ में है, जो चुनाव लड़वाने और जीतने में माहिर हैं। इसीलिए पहली बाज़ी NDA के हाथ लगी लेकिन अभी तो मुक़ाबला शुरू हुआ है।
गूगल का AI hub: चंद्रबाबू नायडू की दूरंदेशी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुरुवार को आंध्र प्रदेश में थे। उन्होंने श्रीसैलम के मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर में शिवजी और पार्वती के दर्शन किए। इसके बाद कर्नूल में 13 हज़ार करोड़ रुपये से ज़्यादा की योजनाओं की शुरुआत की। इनमें रेल, रोड और एनर्जी से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं। गूगल ने कर्नूल में 15 अरब डॉलर के निवेश के साथ AI हब बनाने का एलान किया है। ये हब समुद्र के भीतर केबल से दुनिया भर के AI हब से जुड़ेगा। कर्नूल के AI हब का नोडल प्वाइंट विशाखापत्तनम में बनेगा जहां से समुद्र के नीचे केबल के जरिए इसे ग्लोबल AI नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इससे विशाखापत्तनम भी ग्लोबल AI सेंटर के तौर पर विकसित होगा।
मोदी ने कहा कि चंद्रबाबू नायडू की सरकार ने कर्नूल को ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग के सेंटर के रूप में विकसित करने का फ़ैसला किया है। एक बात तो कहनी पड़ेगी कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चन्द्रबाबू नायडू बहुत आगे की सोचते हैं, वक्त के साथ बदलते हैं। मुझे याद है कि जब चन्द्रबाबू नायडू 1995 में पहली बार अविभाजित आन्ध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे, उस वक्त भारत में कंप्यूटर नया नया आया था, लोग इंटरनेट के बारे में जानते भी नहीं थे लेकिन चन्द्रबाबू नायडू ने 1995 से 2004 के बीच हैदराबाद को साइबर सिटी के तौर पर डेवेलप करने का फैसला किया। हैदराबाद में साइबराबाद के नाम से IT बिज़नेस का मॉडर्न हब बसाया था।
अब ज़माना AI का है तो चन्द्रबाबू नायडू ने गूगल को सस्ते दामों में जमीन दी, सारी सहूलियतें दी, सरकारी अनुमतियों में छूट दी। कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं लेकिन मुझे लगता है चन्द्रबाबू नायडू ने जो फैसला किया, बहुत अच्छा है। गूगल कर्नूल में इन्वेस्ट करेगा, हजारों लोगों को नौकरियां मिलेंगी और भारत AI हब के तौर पर उभरेगा। ये बड़ी बात है।
भारत में माल्या, नीरव मोदी, चोकसी के लिए विशेष जेल
अब तैयारी उन लोगों को कानून के दायरे में लाने की, जो देश में बड़े आर्थिक अपराध करके विदेश भाग गए हैं। सरकार अब विजय माल्या, ललित मोदी, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे भगोड़ों के ऊपर शिकंजा कसने की तैयारी में है। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि हमारी एजेंसियां विदेशों में छुपे अपराधियों को पकड़ लेती हैं, उन्हें भारत लाने की कानूनी प्रक्रिया भी पूरा हो जाती है लेकिन ये अपराधी भारत की जेलों की बदतर हालत का हवाला देकर प्रत्यर्पण से बच जाते हैं। ऐसे अपराधियों के लिए अब हर राज्य में एक स्पेशल जेल बनाये जाने की योजना है, जहां सारे अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन हो, जेल की सारी सुविधाएं इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के मुताबिक़ हों।
अमित शाह ने कहा कि भारत में जुर्म करके विदेश भागे अपराधियों का प्रत्यर्पण एक जटिल मामला है, इसलिए हर राज्य में पुलिस विभाग को स्पेशल extradition cell बनानी चाहिए। इस सेल में ऐसे अफ़सरों को रखा जाए जो extradition से जुड़े सारे क़ानूनों को समझते हों। अमित शाह ने कहा कि एक ऐसा सिस्टम डेवेलप करने की जरूरत है जिसमें अगर किसी भगोड़े के ख़िलाफ़ इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी होता है, तो उसका पासपोर्ट automatically कैंसिल हो जाए।
विदेशों में छुपे भारत के अपराधियों के extradition की 388 याचिकाएं वहां के कोर्ट्स में पेंडिंग हैं। extradition से बचने के लिए ये अपराधी हमेशा भारत की जेलों की हालत का हवाला देते हैं, अपनी जान को ख़तरा बताते हैं, human rights की दलील देकर extradition से बच जाते हैं। इसलिए, इस खामी को दूर करना जरूरी है। सभी जेलों में न सही, लेकिन हर राज्य में कम से कम एक स्पेशल fugitive prison बनाई जानी चाहिए। चूंकि अमित शाह ने ये पहल की है, इसलिए उम्मीद करनी चाहिए कि इस पर काम जल्दी शुरू होगा। (रजत शर्मा)
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