दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट से लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को बड़ा झटका मिला है। कोर्ट ने दोनों की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने लैंड-फॉर-जॉब्स मामले में गैर-आश्रित दस्तावेज (non reliable documents) देने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि हर दस्तावेज पाने का आरोपियों का अधिकार नहीं है। पहले अभियोजन अपने सबूत पेश करेगा, उसी आधार पर होगी सुनवाई। बिना ठोस बचाव के आरोपियों को अतिरिक्त दस्तावेज मांगने की अनुमति नहीं। कोर्ट ने कहा कि याचिका खारिज करने से आरोपियों को कोई नुकसान नहीं। अन्य आरोपियों की समान याचिकाएं भी कोर्ट ने खारिज की।
दो अन्य आरोपियों की भी याचिकाएं रद्द
‘अनरिलायड’ दस्तावेज वे सामग्री होती हैं जिन्हें जांच एजेंसियां जब्त तो करती हैं लेकिन अभियोजन पक्ष की शिकायत में उन पर भरोसा नहीं करतीं। कोर्ट ने कहा कि इन याचिकाओं का उद्देश्य ”मुकदमे को शुरुआत में ही पेचीदगियों की भूलभुलैया में धकेलना” है। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि इन दस्तावेजों को एकमुश्त उपलब्ध कराना न केवल ”उलटी गंगा बहाने” जैसा होगा, बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया को भी ”पूरी तरह अव्यवस्थित” कर देगा। उन्होंने दो अन्य आरोपियों- लालू प्रसाद के निजी सचिव (PS) आर के महाजन और रेलवे के पूर्व महाप्रबंधक महीप कपूर की याचिकाएं भी खारिज की दीं। महाजन ने एक ‘अनरिलायड’ दस्तावेज और कपूर ने ऐसे 23 दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने का अनुरोध किया था।
‘ऐसा लग रहा कि आवेदकों का कार्यवाही को लंबा खींचने का गुप्त इरादा है’
न्यायाधीश गोगने ने बुधवार को पारित 35 पृष्ठ के आदेश में कहा कि मुकदमे पर से अदालत का वैधानिक नियंत्रण ”आरोपियों द्वारा जिरह की आड़ में हथियाया” नहीं जा सकता और ऐसा प्रतीत होता है कि आवेदकों का कार्यवाही को लंबा खींचने का ”गुप्त इरादा” है। कोर्ट ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार और कार्यवाही का शीघ्र समापन सुनिश्चित करने के लिए वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप साक्ष्यों को दर्ज करना आवश्यक है।
‘न्यायिक कार्यवाही जारी रखने पर कोई शर्त लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती’
कोर्ट ने कहा कि आरोपी यह अनुरोध कर रहे हैं कि बचाव की तैयारी शुरू करने से पहले उन्हें सभी या कुछ ‘अनरिलायड’ दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं यानी जिरह शुरू करने के लिए ऐसे दस्तावेजों की उपलब्धता को एक शर्त के रूप में पेश किया जा रहा है। कोर्ट ने याचिकाओं को ”अस्वीकार्य” बताते हुए कहा कि आरोपियों को ”न्यायिक कार्यवाही जारी रखने पर कोई शर्त लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।” कोर्ट ने कहा कि आरोपियों को पहले ही उन दस्तावेजों का निरीक्षण करने का पर्याप्त अवसर दिया गया था, जो साक्ष्यों के उस समूह का हिस्सा हैं, अभियोजन की शिकायत में जिनका इस्तेमाल नहीं किया गया।





































