
भारतीय शेयर बाजार ने पिछले हफ्ते निवेशकों को जोरदार झटका दिया। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। नतीजा यह हुआ कि प्रमुख सूचकांक बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 में तेज गिरावट देखने को मिली। अब निवेशकों की निगाह इस बात पर टिकी है कि नया सप्ताह बाजार के लिए राहत लेकर आएगा या फिर उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहेगा।
पिछले हफ्ते बाजार में आई तेज गिरावट
बीते सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और ऊर्जा कीमतों में उछाल के कारण निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान कमजोर पड़ा। सप्ताह के दौरान बीएसई सेंसेक्स करीब 4,354.98 अंक गिरकर 74,563.92 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 भी 1,299.35 अंक लुढ़ककर 23,151.10 के स्तर पर आ गया। यह हाल के वर्षों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावटों में से एक मानी जा रही है।
पश्चिम एशिया के तनाव ने बढ़ाई चिंता
बाजार में कमजोरी की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव रहा। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखने के संकेतों ने वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी। यह जलमार्ग दुनिया की तेल और गैस सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है। यदि यहां किसी तरह की बाधा आती है तो कच्चे तेल और LNG की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे वैश्विक महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ सकती है।
रुपये की कमजोरी और विदेशी बिकवाली
इस दौरान भारतीय रुपये में भी कमजोरी देखी गई और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FII) ने बाजार से लगातार पैसा निकाला। डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने भी विदेशी निवेशकों को सतर्क बना दिया। यही कारण है कि बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया और निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा।
इस हफ्ते कैसी रह सकती है बाजार की चाल
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाओं पर निर्भर करेगी। खासतौर पर पश्चिम एशिया की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतें बाजार के मूड को तय कर सकती हैं। यदि तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो इससे कंपनियों की लागत और महंगाई दोनों पर असर पड़ सकता है।





































