
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को AI Impact Summit में घोषणा की कि सरकार जल्द ही ‘क्रिएट इन इंडिया (Create in India)’ मिशन लॉन्च करेगी। यह महत्वाकांक्षी पहल देश में उद्योगों को सशक्त बनाने, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करने और भविष्य के लिए तैयार टैलेंट पाइपलाइन विकसित करने पर केंद्रित होगी। वैष्णव ने कहा कि यह मिशन भारत की मौजूदा क्षमताओं को और मजबूत करेगा और देश को वैश्विक स्तर पर सबसे पसंदीदा प्लेटफॉर्म बनाने की दिशा में काम करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का असर समाज और अर्थव्यवस्था पर पूरक होना चाहिए, न कि कमजोर करने वाला। कई विकसित देश एआई को नए मानक के रूप में अपना रहे हैं।
सरकार का दृष्टिकोण
नौकरियों पर एआई के संभावित प्रभाव को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत में प्रतिभा का आधार तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि देश में स्वाभाविक रूप से टैलेंट ग्रोथ हो रही है और सरकार इसे सक्रिय रूप से प्रोत्साहित कर रही है। बजट 2026 की घोषणाओं का उल्लेख करते हुए वैष्णव ने बताया कि देशभर के 15,000 स्कूलों में कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित की जाएंगी।
ये लैब्स उद्योगों के सहयोग से विकसित की जा रही हैं, ताकि छात्रों को शुरुआती स्तर से ही नई तकनीकों और रचनात्मक कौशल से जोड़ा जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में देश की 350 विश्वविद्यालयों में विश्वस्तरीय छात्र अध्ययन कर रहे हैं और इसी तरह एआई के क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में कुशल छात्र तैयार किए जाएंगे।
एआई: इनोवेशन का सहयोगी
एआई को इनोवेशन और रचनात्मकता के लिए खतरा मानने वाली धारणाओं को खारिज करते हुए वैष्णव ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब स्थायी रूप से हमारे साथ है। यह मानव रचनात्मकता या कहानी कहने की क्षमता को प्रतिस्थापित नहीं करेगा, बल्कि उसके साथ मिलकर काम करेगा। उन्होंने कहा कि एआई रचनात्मकता की जगह नहीं लेगा, बल्कि उसके साथ सह-अस्तित्व में रहेगा। नई तकनीक को अपनाने की तुलना उन्होंने “मछली के पानी में जाने” जैसी स्वाभाविक प्रक्रिया से की। सरकार का मानना है कि तकनीक और रचनात्मकता के मेल से औद्योगिक और क्रिएटिव-दोनों क्षेत्रों में नए अवसर पैदा होंगे और भारत वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में उभरेगा।







































