
कॉरपोरेट जगत में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। देश की प्रमुख दवा कंपनी डॉ. रेड्डीज लेबोरेट्रीज को हैकर्स ने चकमा देकर करीब 2.16 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया। ये ठगी इतनी चालाकी से की गई कि कंपनी को पता ही नहीं चला कि जिसे वह भुगतान कर रही है, वह असली नहीं बल्कि एक फर्जी ईमेल आईडी के जरिए बनाया गया जाल था।
यह मामला 5 नवंबर को बेंगलुरु सिटी साइबर क्राइम पुलिस में दर्ज कराया गया है। शिकायत ग्रुप फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड के महेश बाबू के ने दर्ज कराई, जिन्होंने बताया कि उनकी कंपनी को डॉ. रेड्डीज से 2.16 करोड़ रुपये का भुगतान मिलना था। लेकिन इस बीच हैकर्स ने दोनों कंपनियों के बीच हो रही ईमेल बातचीत को हैक कर लिया और असली ईमेल जैसी एक नकली ईमेल आईडी से फर्जी संदेश भेज दिया।
बनाई नकली आईडी
हैकर्स ने कंपनी की असली आईडी kkeshav@grouppharma.in की जगह ‘KKeshav@Grouppharma.in बनाकर डॉ. रेड्डीज की फाइनेंस टीम को मेल भेजा। मेल में लिखा गया था कि अब भुगतान एक नए बैंक खाते (बैंक ऑफ बड़ौदा) में किया जाए। कंपनी ने ईमेल को असली समझकर निर्देशों का पालन किया और 2.16 करोड़ रुपये उस फर्जी खाते में ट्रांसफर कर दिए।
धोखाधड़ी का खुलासा
बाद में जब ग्रुप फार्मास्युटिकल्स को भुगतान नहीं मिला, तब धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई और फर्जी खाते को फ्रीज कराने की कार्रवाई शुरू की गई। शुरुआती जांच में पता चला है कि संदिग्ध आरोपी वडोदरा (गुजरात) के रहने वाले हैं। पुलिस ने इस मामले में आईटी एक्ट की धारा 66(C) (पहचान की चोरी) और 66(D) (भेस बदलकर धोखाधड़ी) के तहत केस दर्ज किया है, साथ ही भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में भी प्रावधान जोड़े गए हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और साइबर एक्सपर्ट ईमेल सर्वर ट्रैकिंग और बैंकिंग लेन-देन की जांच में जुटे हैं।





































