
भारत में रोजगार का पूरी तस्वीर पिछले छह साल में तेजी से बदल गया है। जहां एक समय युवाओं का सपना एक स्थायी सैलरी वाली नौकरी हुआ करता था, वहीं अब ट्रेंड बदल चुका है। लोग नौकरी छोड़ खुद का कारोबार, सर्विस या प्रोफेशन अपनाने की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं। एचएसबीसी बैंक की एम्प्लॉयमेंट ट्रेंड्स इन इंडिया रिपोर्ट के मुताबिक, FY18 से FY24 के बीच भारत में जितनी भी नई नौकरियां बनीं, उनमें सबसे बड़ा हिस्सा सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट का रहा। यानी अब लोग दूसरों के लिए काम नहीं, बल्कि खुद के लिए काम करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट का बेमिसाल उछाल
रिपोर्ट के अनुसार, FY18 में जहां देश में 23.9 करोड़ लोग सेल्फ-एम्प्लॉयड थे, वहीं FY24 तक यह संख्या बढ़कर 35.8 करोड़ पहुंच गई। सालाना 7% CAGR की यह ग्रोथ बाकी सभी नौकरी वाली कैटेगरी को पीछे छोड़ते हुए सबसे ऊपर है। वहीं इसी पीरियड में सैलरीड जॉब्स मात्र 10.5 करोड़ से 11.9 करोड़ तक ही बढ़ीं, जो ग्रोथ सिर्फ 4.1% रही। कैजुअल लेबर जॉब्स में तो CAGR सिर्फ 1.1% की मामूली बढ़त दर्ज हुई।
कामकाजी आबादी भी बढ़ी
रिपोर्ट बताती है कि भारत की लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR) FY18 के 53% से बढ़कर FY24 में 64.3% हो गई। यानी 15–59 वर्ष की उम्र के ज्यादा लोग अब रोजगार की तलाश या काम कर रहे हैं। कुल मिलाकर FY24 तक भारत में 61.4 करोड़ लोग रोजगार में थे, जिसमें 54% नॉन-फार्म और 46% कृषि क्षेत्र में थे।
महिलाओं की रिकॉर्ड हिस्सेदारी
सबसे चौंकाने वाला बदलाव महिलाओं की बढ़ती भागीदारी है। FY24 में कुल 15.5 करोड़ नई नौकरियों में से 10.3 करोड़ नौकरी महिलाओं को मिलीं। महिला रोजगार बढ़त पुरुषों की तुलना में लगभग दोगुनी रही। खासकर कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका काफी बड़ी देखी गई, जहां 7.4 करोड़ महिलाएं कार्यरत थीं।
किस सेक्टर ने दिए सबसे ज्यादा मौके?
नॉन-फार्म जॉब्स में सर्विस सेक्टर की भूमिका सबसे बड़ी रही। 4.1 करोड़ नई नौकरियां यहीं से आईं। इसके अलावा कंस्ट्रक्शन में 2 करोड़ नई नौकरियां, मैन्युफैक्चरिंग में 1.5 करोड़ नई नौकरियां और मैन्युफैक्चरिंग में टेक्सटाइल व अपैरल सेक्टर ने 33% हिस्सेदारी दी। MSME सेक्टर भी रोजगार का बड़ा इंजन साबित हुआ, जिसने FY24 में मैन्युफैक्चरिंग व सर्विसेज रोजगार का 48% हिस्सा दिया।




































