दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र का निधन हो गया। 89 साल के एक्टर को सोमवार को सांस लेने में तकलीफ होने के चलते ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। धर्मेंद्र 14वीं लोकसभा में साल 2004 से 2009 तक बीकानेर से सांसद रहे थे। व
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कांग्रेस के रामेश्वर डूडी के सामने भाजपा ने धर्मेंद्र को उतारा था। कांटे की टक्कर को देखते हुए धर्मेंद्र ने बेटे बॉबी और सनी देओल को जनसभा के लिए बुलाया था।

चुनाव के समय डूडी को हराने के लिए धर्मेंद्र ने सनी और बॉबी को बुलाया था। दोनों ने उनके लिए जमकर प्रचार किया था।
डूडी के सामने लड़ा था चुनाव, सनी-बॉबी को बुलाया था साल 2004 में कांग्रेस ने अपने पूर्व सांसद रामेश्वर डूडी को फिर से मैदान में उतारा तो भाजपा ने एक कदम आगे बढ़ते हुए फिल्म अभिनेता और देश के युवाओं की धड़कन धर्मेंद्र को अपना प्रत्याशी बना दिया था। जाट वोट बैंक पर तगड़ा उम्मीदवार सामने आने के बाद भी रामेश्वर डूडी ने धर्मेंद्र को पूरी टक्कर दी।
अंत में जब धर्मेंद्र और डूडी के बीच मुकाबला कांटे का हो गया तो धर्मेंद्र ने बेटों सनी और बॉबी देओल को बीकानेर बुलाया था। इन दोनों ने रेलवे स्टेडियम में एक जनसभा की। इसके बाद शहरी क्षेत्र में माहौल बदल गया और धर्मेंद्र 57 हजार वोटों से चुनाव जीत गए। खास बात ये थी कि बीकानेर शहर के अलावा सभी सीटों से धर्मेंद्र पीछे रहे। अकेले बीकानेर शहर से इतनी लंबी लीड ली थी कि सभी पांच विधानसभा सीटों का अंतर बराबर कर दिया था।

उन्होंने रामेश्वर डूडी के खिलाफ कभी नहीं कहा। वे उन्हें अपना छोटा भाई बताते थे।
डूडी को बताया था छोटा भाई
धर्मेंद्र ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान कभी रामेश्वर डूडी का नाम लेकर विरोध नहीं किया। उनकी कोई कमी नहीं गिनाई। बल्कि जहां भी उनसे पूछा जाता कि डूडी मजबूत उम्मीदवार हैं तो वो ये ही कहते थे कि रामेश्वर मेरे छोटे भाई जैसे हैं। उधर, डूडी ने भी अपने प्रचार में कभी धर्मेंद्र पर व्यक्तिगत हमला नहीं किया था। हालांकि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उन पर धर्म परिवर्तन करने सहित अनेक आरोप लगाए थे।
सूरसागर के लिए किया था काम
बीकानेर चुनाव प्रचार के दौरान धर्मेंद्र को सूरसागर की गंदगी हमेशा अखरती थी। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से इस बारे में चर्चा की थी। बजट की समस्या आई तो वे स्वयं दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से मिले और सूरसागर के लिए अतिरिक्त बजट दिलाया था। इतना ही नहीं, अपने सांसद कोटे से भी इस काम के लिए बजट दिया था। हालांकि सूरसागर की सफाई का सारा श्रेय तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को ही मिला था।

बीकानेर में धर्मेंद्र की जबरदस्त फैन फॉलोइंग थी।
गुमशुदा के पोस्टर से दुखी हुए
सांसद के रूप में धर्मेंद्र बीकानेर बहुत कम आते थे। इस कारण बीकानेर शहर के स्थानीय लोगों ने उनके खिलाफ एक पोस्टर तैयार किया। इसमें धर्मेंद्र के फोटो के ऊपर लिखा “गुमशुदा”। इस पोस्टर को बड़ा मीडिया कवरेज मिला तो धर्मेंद्र दुखी हुए। उन्होंने तुरंत बीकानेर आने का निर्णय किया। वे दो-चार दिन बाद ही बीकानेर आए और सर्किट हाउस में ठहरे। यहां बिना किसी तामझाम के सभी कार्यकर्ताओं से और जनता से मिले। धर्मेंद्र ने कई पत्रकारों को पीड़ा जताई थी कि उनके लिए ऐसे पोस्टर लगाए गए।

धर्मेंद्र अपने चुनाव प्रभारी सुराना को कोट वाले नेताजी कहते थे।
सुराना को बोले थे ‘कोट वाले नेताजी’
लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने तत्कालीन नेता मानिकचंद सुराना को उनका चुनाव प्रभारी बनाया था। ऐसे में सुराना ही उनके दिनभर के कार्यक्रम तय करते थे और उस कार्यक्रम के हिसाब से नहीं चलने पर नाराज होते थे। धर्मेंद्र कहीं भी जाते तो ये कहते कि “कोट वाले नेताजी” से पूछ लो। दरअसल, सुराना हर वक्त कोट पहनते थे। कई बार उनकी और सुराना की तकरार भी होती, लेकिन वे सुराना को पूरा सम्मान देते थे। सुराना के अलावा भाजपा नेता सत्यप्रकाश आचार्य भी उनके चुनाव प्रचार में साथ में रहते थे।
सांसद कोटे का पूरा उपयोग
धर्मेंद्र ने आम सांसद की तरह अपने कोटे का पूरा उपयोग किया था। कोई भी समाज, संगठन या संस्थान उनसे वित्तीय सहयोग की अपील करती तो धर्मेंद्र निराश नहीं करते थे। आज भी बीकानेर में कई जगह धर्मेंद्र के नाम के बोर्ड लगे हुए हैं, जिसमें उनके सांसद कोटे का उपयोग हुआ था। आमतौर पर भाजपा नेता सत्यप्रकाश आचार्य और उनके निजी सचिव कमल व्यास की अनुशंसा पर धर्मेंद्र कोटे की राशि स्वीकृत कर देते थे।
बीकानेर में है धर्मेंद्र के जबरदस्त फैन
धर्मेंद्र ने बीकानेर से चुनाव तो साल 2004 में लड़ा था लेकिन उनके दीवाने शुरू से रहे हैं। बीकानेर में एक युवा ने उनके नाम से मंदिर ही बना दिया। उसी युवक ने बाद में धर्मेंद्र स्टूडियो के नाम से अपना प्रतिष्ठान बनाया। इसके अलावा अमरसिंहपुरा में भी उनके फेन है। जो हर साल धर्मेंद्र का जन्मदिन सेलिब्रेट करते हैं और उनके घर तक जाते हैं।






































