
बेजुबानों की आवाज
सुप्रीम कोर्ट ने आज आवारा कुत्तों पर अपने आदेश को सुरक्षित रख लिया है। इससे पहले सोमवार को शीर्ष अदालत में आदेश दिया था कि दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा और गाजियाबाद (दिल्ली-एनसीआर) के नगर निकाय आवारा कुत्तों को शहर से हटाकर आश्रय स्थलों पर रखे। आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने एक सवाल खड़ा कर दिया है।
आवारा कुत्तों को हटाना या मिटाना समस्या का हल नहीं हो सकता। अब इस सवाल को लेकर कि फिर रास्ता क्या है? क्या करें? एक तरफ इंसानों की चिंता, दूसरी तरफ़ बेजुबान जानवरों की ज़िन्दगी। इस सवाल को लेकर इंडिया टीवी ने एक कैंपेन चलाया है। लोगों से पूछा कि ऐसा तरीका बताएं जो मानवीय भी हो और व्यवहारिक भी। हम आवारा कुत्तों को सड़कों पर छोड़ नहीं सकते, और उन्हें मरने भी नहीं दे सकते! उन्हें कहां रखें? उनकी देखभाल कैसे करें? कोई रास्ता सुझाइए। इंडिया टीवी के इस कैंपेन में लोग बढ़चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। लोगों ने कई सुझाव भी दिए। इन सुझावों में नसबंदी के अलावा आवारा कुत्तों को Adopt करने का सुझाव भी काफी लोगों ने दिया है।
लोगों ने Adoption को लेकर क्या कहा? कुछ अहम सुझाव
- गाजियाबाद की रहनेवाली प्रिया ने कहा कि सरकार को हर शहर में देशी नस्ल के कुत्तों को Adopt करने के प्रचलन को बढ़ावा देने के लिए सेंटर बनाए जाने चाहिए। इस अभियान को चलाने के लिए डॉग लवर्स और एनजीओ की मदद ली जानी चाहिए जो इस पहल पर पहले से ही काम कर रहे हैं।
- दिल्ली के एक यूजर नितिन ने भी कुत्तों को Adopt करने की पहल का समर्थन किया और कहा, “सरकार को विदेशी नस्ल के कुत्तों की खरीद पर हाई टैक्स लगाना चाहिए। अगर हर 5 में से सिर्फ़ एक घर एक देशी नस्ल के कुत्ते को Adopt कर ले, उसका वैक्सीनेशन कराए और उन्हें ट्रेंड करे। इससे आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान हो सकता है।”
- एक अन्य यूजर महेंद्र झा ने भी लोगों से आवारा कुत्तों को पालतू कुत्तों के रूप में Adopt करने की पहल का समर्थन किया। उन्होंने एनजीओ के माध्यम से पशु कल्याण, जन सुरक्षा और कानूनी नियमों के बारे में जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया।
- डॉ. अविनाश टांक ने आवारा कुत्तों को Adopt करने और जागरूकता अभियान चलाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा, “आवारा जानवरों को Adopt करने के लिए कार्यक्रम या ऑनलाइन अभियान चलाएं, उनकी कहानियां शेयर करें ताकि संभावित Adopt करने वालों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ सकें। लोगों को पालतू जानवर खरीदने के बजाय उन्हें Adopt करने के महत्व के बारे में शिक्षित किया जाना चाहिए।”
- रचना कटारिया ने का कहना था कि जन-जागरूकता पहल के जरिए इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है। उन्होंने इन जानवरों को Adopt करने , उनका पालन-पोषण करने, उन्हें भोजन मुहैया कराने के लिए जन-सामुदायिक भागीदारी का समर्थन किया।
- ओडिशा के भवानीपटना के राजेश अग्रवाल ने सिंगापुर और रोमानिया सहित कई देशों का उदाहरण दिया और ऐसे जानवरों को Adopt करने के अभियानों पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, “अगर देश की नगर पालिकाएं और राज्य प्राधिकरण एक व्यापक, मानवीय नीति अपनाएं – जिसमें नसबंदी, टीकाकरण, आश्रय और Adoptation शामिल हो – तो हम क्रूर उपायों का सहारा लिए बिना आवारा कुत्तों के हमलों को कम कर सकते हैं।”
- नोएडा के दीपक मिश्रा ने कहा, “सभी पशु प्रेमियों को एक कुत्ता Adopt करना चाहिए और उसकी सेवा करनी चाहिए ताकि हम इंसान होने के नाते अपना कर्तव्य निभा सकें और वे भी असहाय न भटकें।”
- देहरादून की गौरी ने कुत्तों को Adopt करने के अभियान चलाने का अनुरोध किया और कहा कि इनके breeders को regulate करने की जरूरत है।
- दिल्ली के रहनेवाले सिद्धार्थ ने सभी आवारा कुत्तों को एमसीडी और एनडीएमसी में रजिस्टर्ड करने का सुझाव दिया ताकि उनकी आबादी को बेहतर ढंग से नियंत्रित किया जा सके और समस्याओं को रोका जा सके। उन्होंने अधिकारियों से अनुरोध किया कि वे कुत्तों को Adopt करने के अभियान को प्रोत्साहित करें।
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