
इवेंट में इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा।
मुंबई: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में आयोजित रोटरी डिस्ट्रिक्ट इवेंट में इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा अपने जीवन के संघर्ष, पत्रकारिता की शुरुआत और ‘आप की अदालत’ शो की रोचक कहानियां साझा कीं। बचपन के बारे में पूछे जाने पर रजत शर्मा ने कहा, ‘बचपन उतना शानदार नहीं था जैसा आप आज परदे पर देखते हैं।’ उन्होंने खास बातचीत के दौरान अपने परिवार, बचपन की यादों, संघर्षपूर्ण जीवन और पिता की सीख के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि कैसे बचपन में एक बार उनके पड़ोसी ने खिड़की बंद कर ली थी कि वह टीवी न देख पाएं, लेकिन उनके पिता ने जब उन्हें काई साल बाद टीवी पर देखा तो कहा था, ‘अब शांति से दुनिया छोड़ सकता हूं।’
रजत शर्मा ने इमरजेंसी के दौर को किया याद
रजत शर्मा ने इमरजेंसी के दौर की बात करते हुए श्री राम कॉलेज के दिनों, अरुण जेटली से दोस्ती और अंडरग्राउंड रहने की कहानी सुनाई। उन्होंने कहा कि उस समय जानकारी का कोई स्रोत नहीं था, इसलिए उन्होंने एक लोगों को जागरूक करने के लिए एक पर्चे के रूप में छोटा सा अखबार शुरू किया। उन्होंने बताया कि तिहाड़ जेल में पुलिस की मार सहने के बावजूद वे कभी नहीं डरे। गिरफ्तारी के समय उनके पिता ने उनसे कहा था, ‘अगर जो आरोप लगे सही हैं, तो डरना मत।’
‘आप की अदालत में पहला शो लालू जी का था’
रजत शर्मा ने बताया कि एम.कॉम करने के बाद उन्होंने सोचा था कि टीचर बनेंगे, लेकिन उन्होंने लिखना सीखा और 1983 में 750 रुपये महीने पर पहली नौकरी मिली। 1985 में मुंबई की एक मैगजीन से जुड़े और 8 साल वहां काम किया। ‘आप की अदालत’ की शुरुआत के बारे में रजत शर्मा ने विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि 1992 में ज़ी टीवी शुरू हुआ। सुभाष चंद्रा के साथ रमेश चौहान और गुलशन ग्रोवर की फ्लाइट में मुलाकात हुई और इसके बाद अदालत के कॉन्सेप्ट पर बात हुई। उन्होंने बताया कि पहला शो 12 फरवरी 1992 को लालू यादव का था।
‘आप की अदालत के पहले एपिसोड ने जीवन बदल दिया’
रजत शर्मा ने कहा, ‘लालू जी ने फोन किया कि वे आ रहे हैं, अपने साथ दो कैमरामैन ला रहे हैं। पास ही में कुछ मजदूर काम कर रहे थे। लालू जी ने कहा, इन लोगों को भी बैठा लीजिए। नमिता जी को जज बनाने के लिए मनाया गया। शो शुरू हुआ, लेकिन किसी ने कहा कि नारियल तो फोड़ा ही नहीं। ऐसे करते-करते शो बहुत अच्छा हुआ, मगर बाद में पता चला कि ऑडियो रिकॉर्ड नहीं हुआ। सब सवाल दोबारा रिकॉर्ड किए गए और उस शो ने पूरा जीवन बदल दिया।’ गेस्ट को कंफर्टेबल बनाने के बारे में उन्होंने कहा, ‘मैं खुद बहुत नर्वस रहता हूं लेकिन अपनी पत्नी रितु की आवाज सुनने के बाद, जब वह कहती हैं 10 सेकंड बचा है, तब दिमाग शांत होता है।’
‘हमने कभी किसी गेस्ट का डिसरिस्पेक्ट नहीं किया’
रजत शर्मा ने कहा, ‘हमने कभी किसी गेस्ट का डिसरिस्पेक्ट नहीं किया। हम हमेशा गेस्ट से कहते हैं कि अगर कोई गलती हो तो हम ठीक कर लेंगे। जनता के मन का सवाल पूछते हैं। शो पूरी तरह अनस्क्रिप्टेड होता है, कुछ भी पहले से तय नहीं होता।’ अरुण जेटली के शो के बारे में उन्होंने बताया कि डिमॉनेटाइजेशन के समय कड़े सवाल पूछे, तो शो के बाद मेरी पत्नी रितु ने कहा कि आपने दोस्त के साथ ठीक नहीं किया। रजत शर्मा ने कहा, ‘जेटली जी ने बाद में कहा, आपका काम है सवाल पूछना, आई एम प्राउड ऑफ यू। ऐसे दिलदार लोग कम मिलते हैं।’
‘शुरुआत में सैलरी देने के लिए भी पैसे नहीं होते थे’
इंडिया टीवी की शुरुआत की कहानी बताते हुए रजत शर्मा ने कहा कि उन्हें इसके लिए एक फ्रीडम फाइटर और एक बुजुर्ग दंपति ने प्रेरित किया। रजत शर्मा ने कहा, ‘शुरुआत में सैलरी देने के लिए भी पैसे नहीं होते थे, लेकिन रितु के साथ मिलकर सारी परेशानियां झेलीं और चैनल खड़ा किया। एडिटोरियल टीम को सिखाया कि लोगों का समय कीमती है, इसलिए सही खबर देनी चाहिए।’ पद्म भूषण मिलने के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘कुछ खास नहीं लगा, बस लोगों का प्यार खास है। सबसे बड़ा सम्मान जनता का प्यार है।






































