
फिनो पेमेंट्स बैंक के एमडी और सीईओ ऋषि गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद बैंक ने सोमवार को अपनी सफाई में कहा है कि उसने किसी भी प्रकार का जीएसटी बकाया नहीं रोका है और वह सभी नियामकीय प्रावधानों का पूरी तरह पालन कर रहा है। बैंक ने एक नियामकीय फाइलिंग में स्पष्ट किया कि जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (DGGI) की जांच कई बैंकों से जुड़े प्रोग्राम मैनेजरों के कार्यों से संबंधित है, न कि बैंक की जीएसटी अनुपालना से। बैंक ने कहा कि संबंधित प्रोग्राम मैनेजरों की कारोबारी गतिविधियों से उसका या उसके अधिकारियों का कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
किन धाराओं के तहत गुप्ता हुए गिरफ्तार
खबर के मुताबिक, डीजीजीआई ने गुप्ता को जीएसटी कानून के कथित उल्लंघन के मामले में गिरफ्तार किया है। उन्हें CGST और SGST अधिनियम, 2017 की धारा 132(1)(a) और 132(1)(i) के तहत हिरासत में लिया गया। जांच एजेंसी कथित शेल कंपनियों और पेमेंट एग्रीगेटर्स के जरिए ऑनलाइन मनी गेमिंग से जुड़े अवैध धन प्रवाह की जांच कर रही है। बैंक ने यह भी दोहराया कि वह किसी भी मंच या प्लेटफॉर्म के जरिए सट्टेबाजी गतिविधियों को न तो बढ़ावा देता है और न ही उसमें शामिल है।
आवश्यक ड्यू डिलिजेंस का पालन किया गया
बैंक ने कहा कि मर्चेंट ऑनबोर्डिंग और प्रोग्राम मैनेजर से जुड़ी प्रक्रियाएं नियामकीय मानकों के अनुरूप हैं और सभी आवश्यक ड्यू डिलिजेंस का पालन किया गया है। बैंक के अनुसार, मर्चेंट ऑनबोर्डिंग संबंधित बिजनेस टीमों द्वारा की जाती है, न कि एमडी-सीईओ द्वारा। साथ ही, प्रोग्राम मैनेजर द्वारा रेफर किए गए मर्चेंट्स के लिए किसी अन्य बैंक के साथ मौजूदा बैंकिंग संबंध होना अनिवार्य है, ताकि यूपीआई लेनदेन सुचारु रूप से हो सके।
18 महीने की समयसीमा
इस बीच, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बैंक को स्मॉल फाइनेंस बैंक में रूपांतरण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए 18 महीने की समयसीमा दी गई है। प्रबंधन ने भरोसा जताया है कि यह प्रक्रिया तय समय से पहले पूरी कर ली जाएगी। गिरफ्तारी की घटना से उद्योग जगत में हलचल है। पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) और स्टार्ट अप पॉलिसी फोरम SPF जैसे संगठनों ने इस मामले पर चिंता जताई है। पीसीआई ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर त्वरित हस्तक्षेप और प्रवर्तन कार्रवाई में संतुलन की मांग की।







































