
Bank FD: आज की इस भागती जिंदगी ने निवेश का तरीका भी पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। देश की एक बड़ी आबादी अब म्यूचुअल फंड और स्टॉक मार्केट में निवेश कर रही है। हालांकि, देश के आम लोग म्यूचुअल फंड और स्टॉक मार्केट के इस जमाने में भी बैंक एफडी को सबसे सुरक्षित निवेश मानते हैं। बैंक एफडी में ग्राहकों को एक तय समय के बाद फिक्स और गारंटीड रिटर्न मिलता है। इसी वजह से देश का एक बड़ा वर्ग आज भी बैंक एफडी को ही सबसे अच्छा और सुरक्षित मानता है। आमतौर पर देखा जाता है कि नौकरीपेशा लोग अपने नाम से एफडी कराते हैं। लेकिन अगर आप अपने बजाय अपनी पत्नी के नाम से एफडी कराएं तो आप न सिर्फ मोटा रिटर्न कमा सकते हैं बल्कि काफी पैसे भी बचा सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे?
एफडी से मिलने वाले ब्याज पर काटा जाता है टीडीएस
उज्जिवन स्मॉल फाइनेंस बैंक की वेबसाइट से मिली जानकारी के अनुसार, अगर कोई भी व्यक्ति एक वित्त वर्ष में एफडी पर 50,000 रुपये से ज्यादा का ब्याज प्राप्त करता है तो उसे 10 प्रतिशत के टीडीएस का भुगतान करना होता है। अगर किसी व्यक्ति के पास पैन नंबर नहीं है तो उसे 10 प्रतिशत से दोगुना यानी 20 प्रतिशत टीडीएस का भुगतान करना होगा। वहीं दूसरी ओर, अगर आप अपनी पत्नी के नाम से एफडी कराते हैं तो आप ये 10-20 प्रतिशत का टीडीएस बचा सकते हैं। आमतौर पर सामान्य परिवारों में महिलाएं या तो लोअर टैक्स ब्रैकेट में होती हैं या फिर हाउस वाइफ होती हैं। अगर आपकी पत्नी हाउसवाइफ हैं तो समझिए आपको टीडीएस पर किसी भी तरह का कोई भुगतान नहीं करना पड़ेगा।
पत्नी के नाम से एफडी कराने पर कैसे मिलेगा फायदा
दरअसल, नए टैक्स सिस्टम के तहत आने वाले जिन लोगों की कुल टैक्सेबल इनकम 4 लाख रुपये से कम है और पुराने टैक्स सिस्टम के तहत आने वाले जिन लोगों की कुल टैक्सेबल इनकम 2.5 लाख रुपये से कम है, उन्हें अपनी एफडी पर टीडीएस से पूरी तरह छूट दी गई है। इसके साथ ही आपको ये भी समझना होगा कि बैंक एफडी से जो ब्याज मिलता है, उसे आपकी इनकम में गिना जाता है। मान लीजिए आपकी कुल सालाना इनकम 12 लाख रुपये है और आपको एफडी के ब्याज के रूप में 2.20 लाख रुपये मिले हैं तो आपकी कुल सालाना आय 14.20 लाख रुपये मानी जाएगी और आपको 14.20 लाख रुपये के हिसाब से ही टैक्स का भुगतान करना होगा।
जॉइंट एफडी में भी उठा सकते हैं फायदा
लेकिन अगर आप अपनी पत्नी के नाम से एफडी कराते हैं तो आप एफडी के ब्याज की वजह से एडिशनल टैक्स के भुगतान से बच सकते हैं। इसके अलावा, अगर आप जॉइंट एफडी कराते हैं और अपनी पत्नी को फर्स्ट होल्डर बनाते हैं तो ऐसी स्थिति में भी आप काफी बचत कर सकते हैं। बताते चलें कि ये फायदा सिर्फ उन लोगों को मिल सकता है, जिनकी पत्नी जॉब नहीं करती हैं।






































