
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने शनिवार को निवेशकों से धैर्य बनाए रखने की अपील की और इसे अनिश्चित समय में सबसे अच्छी रणनीति करार दिया। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण बाजारों में बिकवाली के दबाव के बीच पांडेय ने कहा कि कोरोना महामारी या रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी पिछली घटनाओं ने ये दिखाया है कि समय के साथ बाजार स्थिर हो जाते हैं। सेबी के चेयरमैन ने बताया कि वैश्विक स्तर पर स्थिरता बहाल करने के प्रयास जारी हैं। हालांकि, दुनिया के कुछ हिस्सों में जारी तनाव ने ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता पैदा की है।
अनिश्चित समय में धैर्य बनाए रखना सबसे अच्छी रणनीति
उन्होंने कहा, “कई निवेशकों, खासकर खुदरा निवेशकों के लिए, ऐसे अनिश्चित समय में सबसे अच्छी रणनीति धैर्य बनाए रखना है।” भारतीय पूंजी बाजार नियामक के प्रमुख ने माना कि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में अनिश्चितता हावी है, जो प्रौद्योगिकी बदलाव, एआई के अपनाने और भू-राजनीतिक तनावों के कारण उत्पन्न होती है। पांडेय ने पिछले अनुभव का हवाला देते हुए कहा, “बाजारों में उतार-चढ़ाव आया लेकिन वे अंततः स्थिर हो गए।” उन्होंने कहा कि अनिश्चितता अपवाद नहीं बल्कि वित्तीय बाजारों की एक सामान्य विशेषता है। असली परीक्षा ये है कि एक प्रणाली चुनौतियों के बावजूद कितनी सुचारू, निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से काम कर सकती है।
अस्थिरता बाजारों की एक प्राकृतिक विशेषता
सेबी चीफ ने कहा, “अनिश्चित समय में पूंजी बाजार की ताकत अस्थिरता की अनुपस्थिति में नहीं है। अस्थिरता बाजारों की एक प्राकृतिक विशेषता है। असली ताकत इस विश्वास में है कि प्रणाली तनाव के समय भी निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रभावी ढंग से काम करेगी।” पांडेय ने कहा कि यदि हम संस्थानों को मजबूत बनाना जारी रखें, सहभागिता बढ़ाएं और शासन व्यवस्था को बनाए रखें, तो भारतीय पूंजी बाजार अनिश्चितता से निपट सकते हैं और मजबूत भी बन सकते हैं।
9 दिनों में ₹26.77 लाख करोड़ स्वाहा
अमेरिका और इजरायल ने 28 मार्च को ईरान पर हमला किया था। ईरान पर हमला शुरू होने के दूसरे दिन, यानी 2 मार्च को घरेलू शेयर बाजार में भारी गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत हुई। 3 मार्च को होली के मौके पर बाजार बंद रहे। इसके बाद 7 को शनिवार और 8 मार्च को रविवार की छुट्टी थी। यानी, 2 मार्च से लेकर आज 13 मार्च तक 9 दिनों में बीएसई का मार्केट कैप 26,77,263.69 करोड़ रुपये घट गया। इसका मतलब, ईरान पर हमला शुरू होने के बाद घरेलू बाजार में शुरू हुई गिरावट के बाद से अभी तक निवेशकों के 26,77,263.69 करोड़ रुपये स्वाहा हो चुके हैं।





































