अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के और तेज होने का असर गुरुवार को शेयर बाजार पर देखा गया। कारोबारी सत्र के आखिर में बीएसई सेंसेक्स 246.89 अंकों की जोरदार गिरावट के साथ 74,207.24 के लेवल पर बंद हुआ। इधर, एनएसई का निफ्टी भी 775.65 अंक की तेज गिरावट के साथ 23002.15 के लेवल पर फिसल गया। निफ्टी बैंक भी 1875.05 अंक टूटकर 53451.00 के लेवल पर सरक गया।
टॉप लूजर और गेनर स्टॉक्स
30 डिस्कवरी वाले स्नैक्स में शामिल कंपनियों में इटरनल, बजाज फाइनेंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक, लार्सन एंड टुब्रो और बजाज फिनसर्व प्रमुख रूप से नुकसान में रहे। इस दौरान एचडीएफसी बैंक के शेयर में भारी गिरावट देखने को मिली। बैंक का स्टॉक 5.13 प्रतिशत टूट गया। यह गिरावट उस समय आई जब बैंक के डिपॉजिट अतनु चक्रवर्ती ने नैतिक कारणों का हल देते हुए अपने पद से रिजेक्ट कर दिया।
कुल 3,072 शेयरों में गिरावट
कारोबार के दौरान कुल 3,072 शेयरों में गिरावट आई, जबकि केवल 999 शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। इससे बाजार में बिकवाली का दबाव साफ नजर आया। वोलैटिलिटी (उतार-चढ़ाव) भी ऊंचे स्तर पर रही। इंडिया VIX में 21 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई, जो बाजार में अनिश्चितता और डर को दर्शाता है। सेक्टोरल आधार पर गिरावट व्यापक रही।
गुरुवार को बीएसई में शामिल कंपनियों का प्रदर्शन।
ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली, जहां 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा बैंकिंग, आईटी, मेटल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर भी लगभग 3-4 प्रतिशत तक टूटे। कुल मिलाकर, यह गिरावट बाजार में बढ़ती जोखिम से बचने की प्रवृत्ति (रिस्क एवर्शन) और वैश्विक दबावों का स्पष्ट संकेत देती है।
ब्रेंट क्रूड में जबरदस्त उछाल
वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड में गुरुवार को जबरदस्त उछाल देखा गया। इसकी कीमत 6.75 प्रतिशत बढ़कर 114.8 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। यह तेजी से तब आई जब ईरान ने कतर की एक अहम प्राकृतिक गैस सुविधा के साथ-साथ कुवैत की दो तेल रिफाइनरियों पर हमला किया। गुरुवार को ईरान ने खाड़ी के अरब देशों के ऊर्जा घाटे पर अपने हमले और तेजी कर दिए। इस दौरान सऊदी अरब के रेड सी तट पर स्थित एक रिफाइनरी को बढ़ाया गया। इसके अलावा कतर की एलएनजी सुविधाओं और कुवैत की दो तेल रिफाइनरियों में आग लग गई। बताया जा रहा है कि ये हमले इजरायल द्वारा ईरान के मुख्य प्राकृतिक गैस क्षेत्र पर किए गए हमले के जवाब में किए गए हैं। इस घटना के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में तनाव और अनिश्चितता काफी बढ़ गई है।







































