एयर चाइना ने मंगलवार से दिल्ली और बीजिंग के बीच अपनी नॉन-स्टॉप उड़ानें फिर से शुरू कर दी हैं। इससे दोनों देशों की राजधानियों के बीच सीधी हवाई सेवा बहाल हो गई है, जो वर्ष 2020 के बाद COVID-19 महामारी और पूर्वी लद्दाख तनाव के कारण बंद थी। पीटीआई की खबर के मुताबिक, एयर चाइना अब मंगलवार, शुक्रवार और रविवार को बीजिंग-दिल्ली-बीजिंग उड़ानें संचालित करेगी। इन उड़ानों में Airbus A330-200/300 विमानों का इस्तेमाल किया जाएगा। IndiGo के अप्रैल 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारत-चीन मार्गों पर यात्री लोड फैक्टर 68% से 85% के बीच रहा है। दिल्ली-गुआंगज़ौ और कोलकाता-गुआंगज़ौ जैसे मार्गों पर खासतौर पर शानदार प्रदर्शन देखा गया।
हालिया विस्तार
18 अप्रैल 2026: चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस ने कुनमिंग (युन्नान) से कोलकाता के बीच सीधी उड़ान फिर शुरू की।
नवंबर 2025: शंघाई-दिल्ली मार्ग बहाल हुआ।
29 मार्च 2026: IndiGo ने कोलकाता-शंघाई के बीच दैनिक उड़ानें शुरू कीं। इसके अलावा IndiGo ने कोलकाता-गुआंगज़ौ मार्ग बहाल किया और दिल्ली-गुआंगज़ौ नई सेवा शुरू की।
दोनों तरफ से बढ़ते कनेक्शन
भारतीय और चीनी एयरलाइंस दोनों ही अपनी उड़ानों का विस्तार कर रही हैं। इससे आर्थिक, व्यापार, पर्यटन और लोगों के बीच आदान-प्रदान को नई गति मिलने की उम्मीद है। सिंघुआ यूनिवर्सिटी के नेशनल स्ट्रेटेजी इंस्टीट्यूट के रिसर्च डायरेक्टर कियान फेंग ने कहा कि यह ट्रेंड न सिर्फ दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही को आसान बना रहा है, बल्कि सप्लाई चेन की लागत घटाने, टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सहयोग बढ़ाने के व्यावहारिक कदम भी दिखाता है। यह विकास हाल ही में भारत सरकार द्वारा कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में चीनी निवेश पर लगी पाबंदियों में दी गई ढील के बाद आया है। दोनों देश छह साल की तनातनी के बाद आर्थिक संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
दोनों देशों के लिए सकारात्मक
दोनों पक्षों की और भी एयरलाइंस अपनी सेवाएं बढ़ा रही हैं, जिसका द्विपक्षीय संबंधों की गति को और मजबूत करने के लिए सकारात्मक महत्व है। सिंघुआ यूनिवर्सिटी के नेशनल स्ट्रेटेजी इंस्टीट्यूट के रिसर्च डिपार्टमेंट के डायरेक्टर कियान फेंग ने ग्लोबल टाइम्स को बताया कि यह भारत के और ज़्यादा व्यावहारिक बदलावों को भी दिखाता है, जिसमें उसकी चीन नीति भी शामिल है। कियान ने आगे कहा कि यह ट्रेंड न सिर्फ़ दोनों देशों के बीच लोगों के आने-जाने को आसान बनाता है, बल्कि सप्लाई चेन की लागत कम करने और टेक्नोलॉजी कंपनियों व मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए यात्रा को बढ़ावा देने के लिए ज़्यादा व्यावहारिक उपायों को भी दिखाता है।







































