11 मिनट पहले
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मिर्जापुर सीरीज में मुन्ना त्रिपाठी का रोल निभा चुके दिव्येंदु शर्मा हाल ही में अपने नए गाने ‘जुल्मी सावरिया’ पर डांस करते नजर आए। यह गाना गरबा फेस्टिव वाइब पर बेस्ड है और दिव्येंदु की एनर्जी इसमें साफ झलक रही है। हाल ही में दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में उन्होंने शूटिंग, गाने के अनुभव और अपने डांस के सफर पर खुलकर बातें कीं।
सवाल: इस वाइब के साथ जब आप यह गाना लेकर आए, क्या फीलिंग थी जब पहली बार गाना सुनाया गया?
जवाब: बहुत अच्छा अनुभव हुआ, गाना तुरंत पसंद आ गया। कई बार ऐसा होता है कि सितारे खुद-ब-खुद सामंजस्य बिठा लेते हैं और वही चीज आपके हिस्से में आती है जो आपको करनी होती है। यही इस गाने के साथ हुआ। काम करके बहुत मजा आया और जब लोगों से इतने अच्छे रिएक्शन मिल रहे हैं, तो खुशी और भी बढ़ जाती है।
सवाल: हर किरदार में एक अलग अंदाज और रवैया होता है। यह डांस सॉन्ग में भी दिखा, इसका राज क्या है?
जवाब: मैं बस जो भी कर रहा हूं, उसे एंजॉय करने की कोशिश करता हूं। शायद वही एंजॉयमेंट स्क्रीन पर पर भी दिखता है।
सवाल: अमित त्रिवेदी के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
जवाब: अमित कमाल के कंपोजर और सिंगर हैं। उन्होंने इतना खूबसूरत और आसान गरबा सॉन्ग बनाया है कि इसे लोग सिर्फ डांस ही नहीं, बल्कि गुनगुनाना भी पसंद करेंगे। फेस्टिव सॉन्ग्स अक्सर हाई टेंपो वाले होते हैं, लेकिन इसमें एक परफेक्ट बैलेंस है। उनके साथ काम करना एक शानदार मौका रहा।

सवाल: आपकी गरबा से जुड़े कोई खास यादें?
जवाब: पहली याद तो वही है जब मैं गोरेगांव के बांगुर नगर में रहता था। बहुत अच्छी और शांत सोसाइटी थी। वहां एक बहुत बड़ा मैदान था, जहां शानदार गरबा होता था। पहली बार देखा तो दंग रह गया। लगा जैसे ये बहुत बड़ा आयोजन है। हमारे उत्तर भारत में दिवाली का मेला सबसे बड़ा माना जाता है, लेकिन जब मैंने ये गरबा देखा तो लगा कि ये उससे भी अलग और खास है।
हम लोग भी अंदर जाकर शामिल होने का सोच रहे थे, लेकिन वहां के लोग इतने तैयारी के साथ नाच रहे थे कि लगा दूर से ही पकड़ लिए जाएंगे, तो हमने छोड़ दिया। पर तभी समझ आया कि मुंबई में ये कितना बड़ा उत्सव होता है। यकीनन गुजरात में तो और भी ज्यादा धूमधाम से होता होगा।
सबको रंग-बिरंगे कपड़ों में देखना, उनकी तैयारियां, एक साथ मिलकर उत्सव मनाना ये बहुत अच्छा लगता था। असल में शहर में ऐसे सांस्कृतिक मौके जरूरी हैं, जहां लोग खुशी से एक साथ आएं, जश्न मनाएं, संगीत हो। मेरा मानना है कि ऐसे उत्सव सालभर चलते रहने चाहिए, क्योंकि यही हमें बेहतर इंसान बनाते हैं।

सवाल: सेट पर डांस और एनर्जी का माहौल कैसा रहा?
जवाब: बहुत शानदार। कोरियोग्राफर विजय गांगुली ने गजब का काम किया। उनके स्टेप्स इतने आसान और सहज थे कि तुरंत पकड़ में आ गए। प्रोड्यूसर्स हितेंद्र और पीयूष ने भी बहुत सुंदर माहौल तैयार किया। पूरा सेट किसी फिल्म शूट जैसा लग रहा था।
सवाल: फिल्म इंस्टीट्यूट वाले एक्टर्स को एक्टिंग में निपुण और डांस में कमजोर माना जाता है, आपने यह धारणा कैसे तोड़ी?
जवाब: फिल्म इंस्टीट्यूट (FTII) में जाने से पहले मैं दिल्ली में बारातों में खूब नाचा हूं, तो सबके पास सुर-ताल की एक समझ तो होती ही है। मुझे समझ नहीं आता लोग डांसिंग के बारे में क्यों सोचते हैं कि ‘अरे, आप डांस भी कर लेते हो?’ अरे यार, इंडियन होकर कौन ऐसा है जो डांस ना करता हो! फर्क बस इतना है कि कुछ लोग ताल में नाचते हैं और कुछ अपने ही अंदाज में। शुक्र है कि हम सुर-ताल में नाच लेते हैं।





































