
भारत के कॉरपोरेट जगत में ऑफिस स्पेस के किराए ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। दिल्ली में प्रीमियम ऑफिस किराए में 16.4 फीसदी की वार्षिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो देशभर में सबसे ज्यादा है। वहीं, मुंबई और गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों में भी ऑफिस रेंट्स लगातार बढ़ रहे हैं। यह खुलासा आईआईएम-बेंगलुरु और CRE Matrix की ताजा रिपोर्ट “कमर्शियल प्रॉपर्टी रेंटल इंडेक्स (CPRI)” में हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही में टियर-1 शहरों में औसतन 3.8% की बढ़ोतरी हुई। मुंबई ने तिमाही आधार पर सबसे तेज 3.6% की ग्रोथ दर्ज की, जिससे यह भारत का सबसे स्थिर और लचीला ऑफिस मार्केट बना हुआ है। वहीं, गुरुग्राम में ऑफिस रेंट्स पिछले तिमाही के मुकाबले 3.2% और पिछले साल की तुलना में 8.1% बढ़े हैं।
नवी मुंबई भी पीछे नहीं
नवी मुंबई ने पिछले तीन वर्षों में 9% की CAGR (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) के साथ देश के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में जगह बनाई है। रिपोर्ट में दिल्ली, मुंबई, गुरुग्राम, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, चेन्नई, नोएडा, नवी मुंबई और ठाणे जैसे 10 बड़े शहरों के डेटा शामिल किए गए हैं, जो भारत के 90% से ज्यादा संस्थागत ऑफिस स्पेस का प्रतिनिधित्व करते हैं।
उभरते माइक्रो मार्केट्स का दौर
रिपोर्ट में कहा गया है कि अब पारंपरिक बिजनेस हब के साथ-साथ माइक्रो मार्केट्स भी तेजी से उभर रहे हैं। चेन्नई के नॉर्थर्न सबर्ब्स ने सबसे ज्यादा 9.8% क्वार्टर ऑन क्वार्टर ग्रोथ दर्ज की है। वहीं, बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड इलाके में ऑफिस रेंट्स पिछले तिमाही के मुकाबले 8% बढ़े हैं और यह भारत में सबसे ऊंचे रेंटल इंडेक्स (243) पर बना हुआ है। CRE Matrix के सीईओ अभिषेक किरण गुप्ता के अनुसार, “व्हाइटफील्ड और चेन्नई के उत्तरी उपनगरों में बढ़ोतरी बताती है कि कंपनियां अब पारंपरिक सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट्स से बाहर भी नए हब्स की तलाश में हैं।”
एनसीआर में गुरुग्राम और नोएडा आगे
एनसीआर में NH-48 प्राइम (गुरुग्राम) सबसे तेज प्रदर्शन करने वाला माइक्रो-मार्केट रहा, जहां पिछले तीन सालों में 10.1% CAGR दर्ज हुई। वहीं, नोएडा के सबर्बन इलाकों में ऑफिस रेंट्स में 9.9% की वार्षिक वृद्धि और 8.7% CAGR देखने को मिली।






































