
अगर आप एडवांस टैक्स की आखिरी किस्त जमा करने की 15 मार्च की डेडलाइन चूक गए हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। कई करदाता किसी वजह से समय पर एडवांस टैक्स जमा नहीं कर पाते, लेकिन इसके बाद भी आपके पास कुछ विकल्प मौजूद हैं जिनकी मदद से आप ज्यादा पेनाल्टी से बच सकते हैं। हालांकि, देरी होने पर आयकर विभाग की ओर से ब्याज या जुर्माना लग सकता है। ऐसे में जरूरी है कि आप जल्दी से सही कदम उठाएं और जान लें कि डेडलाइन मिस होने के बाद अब आपको क्या करना चाहिए।
क्या होता है Advance Tax
एडवांस टैक्स वह इनकम टैक्स है जिसे वित्त वर्ष के अंत में एकमुश्त जमा करने के बजाय पहले ही किस्तों में जमा किया जाता है।आयकर विभाग द्वारा तय की गई निर्धारित तिथियों के अनुसार करदाताओं को इसे अलग-अलग किस्तों में जमा करना होता है। आम तौर पर यह टैक्स उन लोगों को देना पड़ता है जिनकी सालाना टैक्स देनदारी एक तय सीमा से अधिक होती है। ऐसे करदाता अपने अनुमानित वार्षिक आय के आधार पर पूरे साल में चरणबद्ध तरीके से एडवांस टैक्स का भुगतान करते हैं, ताकि वित्त वर्ष के आखिर में उन पर एक साथ बड़ा टैक्स बोझ न पड़े।
डेडलाइन चूकने पर आर्थिक नुकसान सीमित करने के हैं कुछ विकल्प
वैसे करदाता जिन्होंने 15 मार्च को एडवांस टैक्स की आखिरी किस्त जमा करने से चूक गए हैं, उनके पास अब भी आर्थिक नुकसान को सीमित करने के कुछ विकल्प मौजूद हैं। आयकर अधिनियम के अनुसार, व्यक्तियों को वित्त वर्ष के दौरान तय समयसीमा के अनुसार किस्तों में अपनी टैक्स देनदारी का भुगतान करना होता है। हालांकि, अगर यह डेडलाइन छूट भी जाए तो इसका मतलब यह नहीं है कि टैक्स जमा करने का मौका पूरी तरह खत्म हो गया है। ऐसे में करदाता बाद में भी टैक्स का भुगतान कर सकते हैं, लेकिन उन्हें देरी के कारण लगने वाले ब्याज या पेनाल्टी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि समय रहते बकाया एडवांस टैक्स जमा कर दिया जाए, ताकि अतिरिक्त वित्तीय बोझ को कम किया जा सके।
घबराने की जरूरत नहीं
अगर आपने 15 मार्च 2026 तक एडवांस टैक्स की आखिरी किस्त जमा नहीं की है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप अभी भी 31 मार्च 2026 तक (या उससे पहले) पेमेंट कर सकते हैं और इसे एडवांस टैक्स के रूप में ही गिना जाएगा। हालांकि इस ग्रेस पीरियड के लिए एक कीमत चुकानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर टैक्सपेयर 15 मार्च को एडवांस टैक्स की चौथी और आखिरी किस्त जमा करने की बस एक और डेडलाइन मानते हैं, लेकिन इस डेडलाइन को पूरा न कर पाने पर इसके बड़े फाइनेंशियल नतीजे हो सकते हैं।
देरी से भुगतान पर कितना ब्याज लगेगा?
एडवांस टैक्स आमतौर पर पूरे वित्त वर्ष के दौरान चार किस्तों में जमा किया जाता है। आयकर विभाग के नियमों के अनुसार करदाताओं को अपनी अनुमानित टैक्स देनदारी का एक तय प्रतिशत अलग-अलग तिथियों तक जमा करना होता है। नियमों के मुताबिक, 15 जून तक 15%, 15 सितंबर तक 45%, 15 दिसंबर तक 75% और 15 मार्च तक 100% एडवांस टैक्स का भुगतान करना होता है। अगर करदाता इन तय तारीखों तक आवश्यक राशि जमा नहीं करते हैं या कम राशि जमा करते हैं, तो उन्हें देरी पर ब्याज देना पड़ सकता है। इसलिए करदाताओं के लिए जरूरी है कि वे इन किस्तों और डेडलाइन का ध्यान रखें, ताकि अतिरिक्त ब्याज या पेनाल्टी से बचा जा सके।
जान लें ये बात
धारा 234C
जानकार का कहना है कि अगर एडवांस टैक्स, तय तिमाही समय-सीमा के अनुसार नहीं चुकाया जाता है, तो धारा 234C के तहत, बकाया राशि पर 1% प्रति माह की दर से ब्याज लगाया जाता है। कुछ दिनों की देरी होने पर भी, बकाया राशि पर एक महीने के लिए 1% ब्याज लगता है, क्योंकि टैक्स की गणना करते समय, महीने के किसी भी हिस्से को पूरे एक महीने के रूप में ही माना जाता है।
धारा 234B
अगर कोई टैक्सपेयर 31 मार्च तक अपनी कुल टैक्स देनदारी का कम से कम 90% हिस्सा चुकाने में नाकाम रहता है, तो धारा 234B के तहत ब्याज लगना शुरू हो जाता है। ऐसे मामलों में, बकाया रकम पर 1 अप्रैल से लेकर पेमेंट होने तक, हर महीने 1% की दर से साधारण ब्याज वसूला जाता है।




































