
बजट 2026-27 को पेश होने में महज चंद रोज ही रह गए हैं। इस बार बजट में डिफेंस को लेकर खासा गहमागहमी रहने की उम्मीद जताई जा रही है। संभव है कि बीते साल ऑपरेशन सिंदूर जैसे हालात के बाद सरकार रक्षा क्षेत्र (डिफेंस सेक्टर) पर विशेष फोकस करें और कैपिटल बजट पर ज्यादा जोर दे। जानकारों का कहना है कि इस बजट में सरकार डिफेंस सेक्टर में एफडीआई यानी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की शर्तों में ढील दे सकती है। इसे मौजूदा 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत किए जाने की उम्मीद है। सरकार विदेशी निवेश की अन्य शर्तों में ढील दे सकती है।
बढ़े बजट का इन चीजों में हो सकता है इस्तेमाल
खबर के मुताबिक, सरकार अपने रक्षा बजट को और बढ़ाने की तैयारी में है। बढ़े बजट का इस्तेमाल सेना की जरूरतों को पूरा करने, जरूरी खरीद और रिसर्च डेवलपमेंट के लिए किया जा सकता है। साथ ही इन अतिरिक्त फंड से नए हथियारों और गोला-बारूद की खरीद और टेक्नोलॉजी पर खर्च किया जा सकता है। जैसा कि आपको पता है बीते साल भारतीय सेना ने 7 मई को पाकिस्तान में आतंकियों के 9 ठिकानों पर एयरस्ट्राइक कर मौजूद आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था। सेना की इस कार्रवाई में 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए थे और बड़ी संख्या में आतंकी घायल भी हुए थे।
20% आवंटन बढ़ने की है उम्मीद
जानकारों का कहना है कि सरकार इस बजट में डिफेंस पर आवंटन 20 प्रतिशत बढ़ा सकती है। चालू कारोबारी वर्ष में भारत का ड़िफेंस बजट 6.81 लाख करोड़ रुपये है। बीते साल बजट में क्षा मंत्रालय (MoD) के लिए 6,81,210.27 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। यह आवंटन वित्त वर्ष 2024-25 के बजटीय अनुमान से 9.53% अधिक था और केंद्रीय बजट का 13.45% है, जो सभी मंत्रालयों में सबसे ज्यादा था। मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 को ‘सुधारों का वर्ष’ के रूप में मनाने का फैसला किया था, जो सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए सरकार के संकल्प को और मजबूत करेगा और इसका उद्देश्य आवंटन का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए रक्षा खरीद प्रक्रिया को सरल बनाना है।








































