7 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी
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इमरान हाशमी की नई फिल्म ‘हक’ मुस्लिम पर्सनल लॉ, यूनिफॉर्म सिविल कोड और शाहबानो केस जैसे संवेदनशील विषयों को सच्चाई और संतुलन के साथ पेश करती है। इस फिल्म में इमरान हाशमी ने शाह बानो के पति ‘मोहम्मद अहमद खान’ का किरदार निभाया है, जो एक कोर्टरूम ड्रामा में विवादों के केंद्र में है। हाल ही में इमरान ने इस फिल्म को लेकर दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। पेश है कुछ प्रमुख अंश..

इमरान हाशमी की फिल्म ‘हक’ 7 नवंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।
सवाल: फिल्म ‘हक’ ऐसे कई मुद्दों पर बात करती है, जैसे मुस्लिम पर्सनल लॉ, यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC), और शाहबानो केस। जिन पर आमतौर पर ज्यादा चर्चा नहीं होती। और जब होती भी है, तो वो सोचने पर मजबूर कर देती है। जब आपने पहली बार इस फिल्म की कहानी सुनी, तो क्या आपको ज्यादा जिम्मेदारी महसूस हुई या ये एक चैलेंज लगा?
जवाब: दोनों। ये फिल्म अहमद खान और शाहबानो केस से प्रेरित है, जो 1985 में हुआ था। मुझे इस केस के बारे में थोड़ा पता था, लेकिन गहराई से नहीं। हमारे डायरेक्टर और राइटर ने इस कहानी को बहुत ही संतुलित और बिना पक्षपात के दिखाया है। इसमें दो लोगों के रिश्ते की शुरुआत, उनका प्यार, शादी और फिर आपसी टकराव को बहुत सच्चाई से दिखाया गया है।
कहानी बाद में एक रोमांचक कोर्टरूम ड्रामा बन जाती है। दरअसल, ये फिल्म इमोशन और इंसानियत से भरी एक खूबसूरत कहानी है। यही इसकी असली ताकत है। क्योंकि सिर्फ कोर्ट की बहस से कहानी नहीं बनती, उसमें इंसानी भावनाएं जरूरी होती हैं। फिल्म में औरत की आवाज, इंसाफ का मतलब और समाज में बदलाव की ज़रूरत जैसे कई गहरे मुद्दे उठाए गए हैं।
सवाल: अक्सर कहा जाता है कि फिल्में समाज का आईना होती हैं, और कभी-कभी समाज को आईना भी दिखाती हैं। क्या फिल्म ‘हक’ ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब देगी?
जवाब: यह कहना मुश्किल है कि दर्शक फिल्म देखकर क्या सोचेंगे। जब असली केस हुआ था, तब लोग दो हिस्सों में बंट गए थे। एक तरफ लोगों की अपनी धार्मिक और पारंपरिक मान्यताएं थीं, और दूसरी तरफ संविधान के अनुसार समान न्याय की बात थी। शाहबानो ने कहा था कि वह एक भारतीय मुस्लिम महिला हैं और उन्हें देश के सेक्युलर कानून के तहत न्याय चाहिए।
यही इस फिल्म की कहानी का मूल है। जब कोर्ट का फैसला आया, तो कुछ लोगों ने उसे स्वीकार किया और कुछ असहमत रहे। एक अच्छी फिल्म वही होती है, जो खत्म होने के बाद लोगों के भीतर चर्चा और सोच पैदा करे। अगर ‘हक’ लोगों में सवाल उठाती है, तो वही असली बदलाव की शुरुआत होगी।

सवाल: सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का असर आज भी दिखाई देता है। 40 साल बाद भी जब यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) की बात होती है, तो समाज और देश की राजनीति पर उसका प्रभाव दिखता है। आज भी इस पर बहस जारी है और कई राज्य इसे लागू करने की बात कर रहे हैं। इस पर आपका क्या विचार है?
जवाब: मैं राजनीति में नहीं जाना चाहता। एक कलाकार के नजरिए से जब मैंने फिल्म की कहानी पढ़ी, तो लगा कि यह महिलाओं के अधिकारों पर आधारित फिल्म है। यह बताती है कि कैसे कई बार शादी टूटने के बाद पुरुष अपनी जिम्मेदारियों से भाग जाते हैं और महिलाएं बच्चों के साथ संघर्ष करती हैं। उन्हें नहीं पता होता कि न्याय कहां मिलेगा।
यह फिल्म ऐसी महिलाओं को इंसाफ के लिए लड़ने की हिम्मत देती है। जैसे शाहबानो ने लड़ा था। साथ ही यह मर्दों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि हम एक पुरुष प्रधान समाज में रहते हैं और हमें अपने रवैये को बदलने की जरूरत है।
सवाल: फिल्म में आपने अपने विश्वास और सच्चाई के लिए सिस्टम से लड़ने वाली भूमिका निभाई। क्या असली जिंदगी में भी कभी अपने हक के लिए लड़ना पड़ा है?
जवाब: हां, बिलकुल। हर इंसान की जिंदगी में ऐसे पल आते हैं जब उसे अपने सही विचारों और भरोसे के लिए खड़ा होना पड़ता है। मुझे अभी कोई खास मौका याद नहीं, लेकिन कई बार ऐसा हुआ है कि मैंने अपने सोचने के तरीके और सिद्धांतों के लिए डटकर बात रखी। ये सिर्फ औरतों के सम्मान की नहीं, बल्कि मर्दों के लिए भी सीख है कि अगर आप सही हैं, तो चुप मत रहो,अपने हक के लिए बोलो।
सवाल: जब यामी गौतम आपकी इतनी तारीफ करती हैं, तो आपको कैसा लगता है? क्या शूटिंग के दौरान कोई यादगार पल रहा?
जवाब: यामी गौतम एक शानदार अभिनेत्री हैं। वो अपने हर किरदार को बहुत मेहनत और सच्चाई से निभाती हैं। उनके साथ काम करते हुए मैंने बहुत कुछ सीखा। उनका काम करने का तरीका और समर्पण काबिल-ए-तारीफ है। मेरे लिए उनके साथ काम करना एक खास अनुभव था, क्योंकि उनसे हर दिन कुछ नया सीखने को मिला।

सवाल: जब आपका नाम आता है, तो लोग इंटेंस सीन, रोमांस और शानदार एक्टिंग की उम्मीद करते हैं। साथ में आपके गाने भी बहुत पसंद किए जाते हैं। इस फिल्म में भी “कबूल, कबूल” नाम का एक प्यारा और दिल को छूने वाला गाना है। इसके म्यूजिक के बारे में आप क्या कहेंगे?
जवाब: इसका म्यूजिक बहुत सुंदर है। विशाल ने फिल्म के मूड और कहानी के हिसाब से बेहतरीन संगीत दिया है। इसकी धुन, इसका एहसास, सब कुछ फिल्म से जुड़ा हुआ है। गाने में जो भावना और जुड़ाव है, उसने इसे खास बना दिया है। विशाल मिश्रा ने उस जज्बात को बहुत अच्छी तरह पकड़ा है।
सवाल: फिल्म ‘फुटपाथ’ से लेकर ‘हक’ तक, आपके किरदारों में जो इंटेंसिटी और रोमांस दिखता है, उसमें आप एक्टर के तौर पर अपने इवोल्यूशन या ग्रोथ को कैसे देखते हो?
जवाब: सच बताऊं तो मुझे खुद नहीं पता। हर फिल्म कुछ नया सिखा जाती है। जिन लोगों के साथ काम करता हूं, डायरेक्टर, को-एक्टर्स,उनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता है। कई सालों से मेरी कोशिश यही रही है कि हर बार अलग किरदार निभाऊं और हर फिल्म के साथ एक बेहतर एक्टर बनता जाऊं।
मैं कभी ये नहीं सोचता कि अब मैं पूरी तरह सफल हो गया हूं, क्योंकि जिस दिन कोई एक्टर ये सोचने लगता है, उसी दिन उसका सफर रुक जाता है।
‘हक’ में भी मैंने अपने डायरेक्टर, राइटर और पूरी टीम से बहुत कुछ सीखा। अगर हर फिल्म को एक नई सीख की तरह लें तो करियर लंबा चलता है। लेकिन अगर सीखना बंद कर दें, तो करियर जल्दी खत्म हो जाता है। जो लोग अपनी कला को सुधारते रहते हैं, वही इंडस्ट्री में टिके रहते हैं।








































