
मिडिल-ईस्ट में युद्ध के कारण सप्लाई बाधित होने से देश में एलपीजी की खपत मार्च के पहले पखवाड़े में 17.7 प्रतिशत घट गई। प्रारंभिक उद्योग आंकड़ों से ये जानकारी मिली है। आंकड़ों के अनुसार, 15 मार्च तक देश में एलपीजी की खपत घटकर 11.47 लाख टन रह गई, जो पिछले साल मार्च के शुरुआती 15 दिनों में 13.87 लाख टन के मुकाबले 17.3 प्रतिशत कम है। ये इस साल फरवरी के शुरुआती 15 दिनों की 15.57 लाख टन मांग से 26.3 प्रतिशत कम है। बताते चलें कि भारत अपनी कुल एलपीजी की जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें से ज्यादातर गैस ईरान के नियंत्रण वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने से बाधित हुई सप्लाई
अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर दिया था। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से सप्लाई प्रभावित होने के कारण सरकार ने घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए होटल जैसे वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों और उद्योगों को एलपीजी की सप्लाई में कटौती की है। पब्लिक सेक्टर की 3 तेल कंपनियों के प्रारंभिक बिक्री आंकड़ों के अनुसार 1 से 15 मार्च के दौरान एलपीजी खपत 2024 की समान अवधि की तुलना में 16 प्रतिशत और 2023 की समान अवधि की तुलना में 10.6 प्रतिशत कम रही।
बीते कुछ सालों से लगातार बढ़ रही है एलपीजी की खपत
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की बाजार में करीब 90 प्रतिशत हिस्सेदारी है। एलपीजी खपत में पिछले कुछ साल में सालाना आधार पर 3 से 4 प्रतिशत की स्थिर वृद्धि देखी गई थी, जिसका कारण सरकार द्वारा लकड़ी और अन्य प्रदूषणकारी ईंधनों की जगह स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना है।
एटीएफ की खपत भी गिरी, पेट्रोल-डीजल की मांग में बढ़ोतरी
युद्ध की वजह से खाड़ी देशों ने एयर स्पेस बंद कर दिए थे, जिसकी वजह से फ्लाइट ऑपरेशन प्रभावित हुआ। एयरलाइन कंपनियों ने इस दौरान काफी कम फ्लाइट ऑपरेट कीं, जिसके कारण विमान ईंधन (एटीएफ) की खपत भी प्रभावित हुई। मार्च के शुरुआती 15 दिनों में एटीएफ की खपत 4 प्रतिशत घटकर 3,27,900 टन रह गई, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में कम है। वहीं मासिक आधार पर इसमें 12.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इन दो युद्ध-प्रभावित ईंधनों के अलावा पेट्रोल और डीजल की मांग में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। पेट्रोल की बिक्री 13.2 प्रतिशत बढ़कर लगभग 15 लाख टन हो गई जबकि डीजल की खपत 8.2 प्रतिशत बढ़कर 33.84 लाख टन रही।



































