असम में कांग्रेस को दो बड़े झटके लगे, नगांव से कांग्रेस के सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और वह बीजेपी में शामिल हो गए। उनके बेटे प्रतीक बोरदोलोई ने कांग्रेस अध्यक्ष को पत्र लिख कर विधानसभा की उम्मीदवारी से हटने का ऐलान कर दिया। प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष नवज्योति तालुकदार ने भी पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी, वह भी बीजेपी में शामिल होने वाले हैं। गुरुवार को बीजेपी ने असम में अपने 88 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी. प्रद्युत बोरदोलोई दिसपुर से और मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा जलुकबाड़ी से चुनाव लड़ेंगे। पूर्व असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा पिछले महीने बीजेपी में शामिल हुए थे, उन्हें भी टिकट दिया गया है। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा, “देखते जाइए, कांग्रेस में अब कोई बड़ा हिन्दू नेता नहीं बचेगा क्योंकि सारे नेता कांग्रेस की तुष्टीकरण नीति से परेशान हैं, असम की डैमोग्राफी पर पड़ रहे असर से टेंशन में हैं।” इस बार असम में बीजेपी कुल 126 में से 89 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, बाकी 37 सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ी गई है। इनमें से 26 सीटें असम गण परिषद के लिए और 11 सीटें बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट को दी गई है।
बोरदोलोई को बीजेपी में शामिल कराने के लिए मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा मंगलवार को ही दिल्ली पहुंच गए थे। उसी रात प्रद्युत बोरदोलोई से उनकी बात हो गई, अगले दिन प्रद्युत फिर से हिमंत विश्व शर्मा और असम बीजेपी अध्यक्ष दिलीप सैकिया से मिले और बीजेपी में शामिल हो गए। इसके बाद हिमंत विश्व शर्मा ने प्रद्युत की मुलाकात गृह मंत्री अमित शाह से करवाई. बीजेपी में शामिल होने के बाद प्रद्युत बोरदोलोई ने कहा, वह पुराने कांग्रेसी है, कांग्रेस उनके डीएनए में है, लेकिन पिछले कुछ सालों में उन्हें पार्टी ने हाशिये पर डाल दिया, बार-बार उनका अपमान किया गया, विधानसभा टिकटों के बंटवारे में उनकी बातें नहीं सुनी गई। असम में टिकटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस ने प्रियंका गांधी की अध्यक्षता में स्क्रीनिंग कमेटी बनाई है। इस कमेटी में सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद भी हैं। जब प्रद्युत बोरदोलोई ने नाम लेकर इमरान मसूद पर वार किया, तो इमरान मसूद ने कहा कि प्रद्युत को ये नहीं भूलना चाहिए कि वह मुसलमानों के वोट से सांसद बने हैं, नगांव में 65 प्रतिशत मुसलमान है, जिनमें से अधिकतर ने पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी के खिलाफ वोट दिया।
जवाब में प्रद्युत बोरदोलोई ने कहा, “इमरान मसूद फिरकापरस्त हैं, उनके दिमाग में नफरत का ज़हर भरा है, वह वंदेमातरम का अपमान करते हैं, स्क्रीनिंग कमेटी में आपराधिक छवि वाले लोगों का समर्थन करते हैं लेकिन कांग्रेस आला कमान सब कुछ जानकर भी अनजान बना हुआ है।” कांग्रेस ने प्रद्युत बोरदोलोई को रोकने और मनाने की भरसक कोशिश की। कांग्रेस प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह और गौरव गोगोई प्रद्युत बोरदोलोई से मिले। प्रियंका गांधी ने कहा कि प्रद्युत की नाराजगी दुखद है, सिर्फ एक टिकट का मसला है, इस मुद्दे पर बात हो सकती थी। लेकिन जब प्रद्युत नहीं माने और बीजेपी में शामिल हो गए, तो प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, “आखिर विचारधारा भी कोई चीज़ होती है।”
मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि कांग्रेस के नेता चाहे कुछ भी दावा करें, लेकिन असम में कांग्रेस की ताकत खत्म हो चुकी है, जो थोड़े बहुत अच्छे नेता बचे हैं, वे भी बीजेपी से जुड़ना चाहते हैं। भूपेन बोरा के बाद प्रद्युत बोरदोलोई का बीजेपी में जाना हिमंत विश्व शर्मा के लिए बड़ी कामयाबी है। प्रद्युत बोरदोलोई 65 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाली सीट से चुनाव जीते थे। वह लगातार चार बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं, दो बार कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं, इसलिए कांग्रेस को झटका तो लगेगा। हिमंत विश्व शर्मा ने दो महीने पहले कहा था कि कांग्रेस में कोई बड़ा हिन्दू नेता नहीं बचेगा। सारी दुनिया को पता था कि क्या होने वाला है। बस कांग्रेस के नेतृत्व को ही नहीं पता चला कि अंदर ही अंदर क्या हो रहा है। जब भी चुनाव आते हैं, कांग्रेस के नेता पार्टी छोड़कर भागते हैं और कांग्रेस बीजेपी पर खरीदफरोख्त का इल्जाम लगाकर चुप हो जाती है और फिर ये कहकर बात को टालने की कोशिश करती है कि एक-दो नेताओं के जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन जब चुनाव के नतीजे आते हैं तो साफ दिखाई देता है कि कितना फर्क पड़ा और नेतृत्व कैसे फेल हुआ? (रजत शर्मा)
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