
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ओपन मार्केट ऑपरेशन्स (OMO) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद कर बैंकिंग सिस्टम में 1 लाख करोड़ रुपये डालेगा। आरबीआई ने सोमवार को बैंकिंग सिस्टम में 50,000 करोड़ रुपये डाल दिए हैं, जबकि बाकी के 50,000 करोड़ रुपये 13 मार्च को डाले जाएंगे। आरबीआई ने एक बयान में कहा कि उसने 13,507 करोड़ रुपये के 6.33 प्रतिशत सरकारी प्रतिभूति (GS) 2035 बॉन्ड, 13,494 करोड़ रुपये के 6.01 प्रतिशत सरकारी प्रतिभूति 2030 बॉन्ड, 8157 करोड़ रुपये के 6.10 प्रतिशत सरकारी प्रतिभूति 2031 बॉन्ड, 6955 करोड़ रुपये मूल्य के 7.30 प्रतिशत सरकारी प्रतिभूति 2053 बॉन्ड खरीदे हैं। इनके अलावा 4479 करोड़ रुपये के 7.18 प्रतिशत जीएस 2033 बॉन्ड, 2304 करोड़ रुपये के 6.92 प्रतिशत जीएस 2039 बॉन्ड और 1104 करोड़ रुपये के 6.19 प्रतिशत जीएस 2034 बॉन्ड खरीदे गए हैं।
बैंकिंग सिस्टम में उपलब्ध है 2.41 लाख करोड़ रुपये का अधिशेष
वर्तमान में बैंकिंग सिस्टम में तरलता अधिशेष (जरूरत से ज्यादा नकदी) करीब 2.41 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। ये ओएमओ खरीद नीलामी बैंकिंग सिस्टम से बड़े पैमाने पर नकदी निकासी की आशंका को देखते हुए की गई है। दरअसल, इस महीने के अंत में एडवांस टैक्स और जीएसटी के भुगतान होने वाले हैं। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, चालू कैलेंडर वर्ष की शुरुआत से अब तक केंद्रीय बैंक ओएमओ के जरिए सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद कर लगभग 2.50 लाख करोड़ रुपये की नकदी डाल चुका है।
OMO क्या होता है और ये कैसे काम करता है
ओपन मार्केट ऑपरेशन्स यानी OMO एक बैंकिंग प्रक्रिया है, जिसके तहत बैंक अपने पास रखे हुए सरकारी बॉन्ड्स को RBI को दे देते हैं। RBI इन बॉन्ड्स के लिए बैंकों के खाते में नकद पैसा जमा कर देता है। दरअसल, ये पूरी प्रक्रिया बैंकों को कैश की किल्लत से बचाने के लिए की जाती है। दरअसल, मार्च के अंत में लोग टैक्स का भुगतान करने के लिए बैंकों में जमा पैसे निकाल लेते हैं। ऐसे में, बैंकों के पास कैश की कमी न हो जाए, इसलिए आरबीआई बैंकों से सरकारी बॉन्ड्स लेकर उन्हें कैश दे देता है। आरबीआई, बैंकों के साथ इस प्रक्रिया को इसलिए अंजाम देता है, ताकि बैंक जरूरतमंदों को लोन देना जारी रख सकें।







































