
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक संगठन कार्य में विस्तार, राष्ट्रहित में समाज की सज्जन शक्ति की अधिक सक्रियता और सामाजिक समरसता के संकल्प के साथ सम्पन्न हुई। बैठक के अंतिम दिन संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने पत्रकारों से संवाद में बताया कि पिछले वर्ष में संगठन कार्य का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। संघ की शाखाएं लगभग छह हजार की वृद्धि के साथ 88 हजार से अधिक हो गई हैं तथा स्थान भी बढ़कर 55 हजार से अधिक हो गए हैं। इसके साथ ही साप्ताहिक मिलन और मंडली की संख्या भी बढ़ी है। संगठन कार्य में विस्तार को इस प्रकार देखना भी आवश्यक है कि अंडमान, अरुणाचल प्रदेश, लेह और दुर्गम जनजातीय क्षेत्रों में भी संघ की शाखाएं संचालित हो रही हैं। संघ शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में भी इस सांगठनिक विस्तार को स्पष्टता से देखा जा सकता है।
दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि सांगठनिक विस्तार के साथ संघ समाज में गुणवत्ता संवर्धन के लिए भी निरंतर कार्य कर रहा है। पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज को सकारात्मक परिवर्तन के लिए प्रेरित करना महत्वपूर्ण है। भारतीय अथवा हिन्दुत्व केवल एक विचार नहीं, बल्कि जीवन शैली है और इसके माध्यम से समाज में गुणवत्ता का विस्तार होना चाहिए। इसी उद्देश्य से समाज की सज्जन शक्ति को एकत्र करना और ‘पावर ऑफ गुड’ का राष्ट्रहित में प्रवृत्त होना आवश्यक है।
गौसेवा और ग्रामविकास की भी योजनाओं पर विचार
संघ के आगामी वर्ष के नियमित प्रशिक्षण वर्गों की जानकारी दी और बताया कि 11 क्षेत्र के वर्ग तथा एक नागपुर के वर्ग को मिलाकर कुल 96 प्रशिक्षण वर्ग संचालित किए जाएंगे। प्रतिनिधि सभा में गौसेवा और ग्रामविकास की भी योजनाओं पर विचार किया गया है। नागरिकों को प्रेरित किया जाएगा कि वे घर की छत पर सब्जी उगाएं, उसमें देसी गोबर और गौमूत्र की खाद का उपयोग करें। जिससे गौसंवर्धन में सभी सहयोग कर सकते हैं। इसी तरह हरित घर बनाने का भी संकल्प नागरिक ले सकते हैं, जिससे घर में पॉलीथीन का न्यूनतम उपयोग, जल संरक्षण आदि प्रयास किए जा सकते हैं।
प्रांत के स्थान पर छोटी इकाई संभाग बनाने का प्रस्ताव
संघ की संगठनात्मक संरचना में परिवर्तन संबंधित प्रश्न पर उन्होंने कहा कि संरचना में विकेन्द्रीकरण पर विचार हुआ है, जिसमें प्रांत के स्थान पर छोटी इकाई संभाग बनाने का प्रस्ताव है। जिसके लागू होने पर 46 प्रांतों के स्थान पर 80 से अधिक संभाग होंगे। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में सरकार्यवाह जी ने कहा कि समाज में जातिगत आधार पर विभेद को समाप्त करने के लिए मीडिया को भी आगे आना चाहिए और किसी भी चुनाव में मतदाताओं की संख्या का जाति आधारित आकलन बंद करना चाहिए। वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में देश की सरकार द्वारा राष्ट्रहित में किए जा रहे कूटनीतिक प्रयासों की सराहना की और कहा कि संघ विश्व में शांति और विकास का पक्षधर है।
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