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शक्ति कपूर आज अपना 73वां जन्मदिन मना रहे हैं।
शक्ति कपूर… एक ऐसा नाम, जिसने हिंदी सिनेमा में कभी खलनायक बनकर डराया, तो कभी अपनी कॉमिक टाइमिंग से लोगों का दिल जीत लिया। फिर चाहे वो नंदू सबका बंदू हो या क्राइम मास्टर गोगो, हर किरदार में उन्होंने जान डाल दी।
बचपन से शक्ति कपूर को क्रिकेट खेलने का शौक था, लेकिन उनके पिता चाहते थे कि वह कपड़ों की दुकान संभालें। इस बात से वह खुश नहीं थे और अक्सर परेशान रहने लगे। ऐसे में उनके दोस्तों ने चुपचाप फिल्म इंस्टीट्यूट का फॉर्म भर दिया और यहीं से शुरू हुई बॉलीवुड का सबसे बड़ा खलनायक बनने की कहानी।
आज शक्ति कपूर के 73वें जन्मदिन पर जानिए उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से…

मिडिल क्लास फैमिली से थे, पिता चाहते थे कपड़ों की दुकान संभालें
शक्ति कपूर एक मिडिल क्लास परिवार से ताल्लुक रखते थे। उनके पिता दिल्ली के कनॉट प्लेस में एक कपड़ों की दुकान चलाते थे। कपड़े तैयार करने के लिए उनके पास अलग-अलग यूनिट्स थीं। उनके पिता चाहते थे कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वह दुकान को संभालें, क्योंकि उन्हें लगता था कि शक्ति इसे अच्छी तरह चला सकते हैं।
हालांकि शक्ति की रुचि बचपन से ही खेलों में थी, खासकर क्रिकेट में। उन्होंने स्टेट लेवल तक क्रिकेट खेला था और स्पोर्ट्स कोटे के तहत ही उनका किरोड़ीमल कॉलेज में एडमिशन हुआ था। शक्ति कभी भी दुकान पर बैठना नहीं चाहते थे। वे टूर एंड ट्रैवल का बिजनेस करना चाहते थे, जिसकी वजह से अक्सर उनका अपने पिता से झगड़ा हो जाता था।
दोस्तों की बदौलत फिल्मों में आए, बिना पूछे भर दिया एडमिशन फॉर्म
शक्ति के मन में हमेशा यही चलता रहता था कि उन्हें अपने पिता की दुकान संभालनी पड़ेगी। यही सोचकर वे अक्सर परेशान रहने लगे थे। ये बात उन्होंने दोस्तों को भी बताई। उनके कुछ दोस्त फिल्म संस्थान ‘एफटीआईआई’ (फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया) का फॉर्म भर रहे थे, तो उन्होंने शक्ति कपूर का फॉर्म भी भर दिया। उस समय तक शक्ति को एक्टिंग में कोई खास रुचि नहीं थी।
कुछ समय बाद उनके घर एक चिट्ठी आई, जिसमें एफटीआईआई के रिटेन टेस्ट के लिए दिल्ली आने को कहा गया था। पहले तो वे हैरान रह गए कि यह कैसे हुआ। जब दोस्तों से पूछा, तो उन्होंने सारी बातें बताईं और टेस्ट देने के लिए साथ चलने को कहा।
इसके बाद वह दोस्तों के साथ टेस्ट देने चले गए। बाद में उन्हें ऑडिशन के लिए बुलाया गया, तो वह भी देने पहुंच गए। ऑडिशन के दौरान उन्होंने देखा कि सामने दिग्गज अभिनेता अशोक कुमार (दादा मुनि), अभिनेत्री कामिनी कौशल और प्रसिद्ध निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी बैठे थे। उनके सामने परफॉर्म करना था। इतने बड़े नामों को देखकर सबसे पहले उन्होंने उनके पैर छुए और मन ही मन बहुत खुश हुए कि ऐसे लोगों से मिलने का अवसर मिला।
उन्हें पूरा यकीन था कि यहां उनका कुछ नहीं होने वाला, इसलिए नर्वस नहीं हुए और अपने डायलॉग्स बोलने लगे। इस दौरान देशभर से करीब 48,000 लोगों ने टेस्ट दिया था, लेकिन सिलेक्शन सिर्फ 10 लड़कों का ही होना था। दिल्ली से केवल तीन लड़के चुने गए अनिल धवन, नसीरुद्दीन शाह और शक्ति कपूर।
शक्ति कपूर के सिलेक्शन से उनके दोस्त चौंक गए और उन्हें लगा कि शायद पैसे देकर सिलेक्शन करवाया गया है। बाद में शक्ति कपूर ने अपनी मां को बताया कि उनका एफटीआईआई में चयन हो गया है और अब स्क्रीन टेस्ट के लिए बुलाया गया है। वह पुणे पहुंचे और स्क्रीन टेस्ट में भी पास हो गए।

शक्ति कपूर (दाएं) के बचपन की तस्वीर
मिथुन चक्रवर्ती ने की थी रैगिंग, रोते हुए शक्ति ने मांगी थी माफी
जब शक्ति कपूर दिल्ली छोड़कर पुणे के एफटीआईआई (फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया) जा रहे थे, तो ट्रेन में उनकी मुलाकात एक शख्स से हुई, जो खुद भी वहीं एडमिशन लेने जा रहा था। सफर के दौरान दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई। चूंकि कोर्स शुरू होने में कुछ वक्त था, उस दौरान वह दोस्त अपनी बहन की शादी में शामिल होने मुंबई जा रहा था और शक्ति कपूर भी उसके साथ चले गए।
मुंबई में उन्हें पता चला कि शादी उस वक्त के मशहूर एक्टर विनोद खन्ना के भाई प्रमोद खन्ना की है। शादी में राकेश रोशन सहित कई बॉलीवुड हस्तियां मौजूद थीं। यह देखकर शक्ति कपूर को भी अपने भीतर एक स्टार जैसा फील होने लगा।
डीडी उर्दू को दिए एक इंटरव्यू में शक्ति कपूर ने बताया, जब हम पुणे पहुंचे तो मेरे हाथ में बीयर थी और मैं इस बात से बेहद खुश था कि जैसे मैं पहले ही स्टार बन चुका हूं। हॉस्टल पहुंचने पर मैंने देखा कि एक लड़का खड़ा है, जिसकी धोती में इतने छेद थे कि गिन पाना मुश्किल था। वह सांवला था, लेकिन उसकी बॉडी मजबूत और हट्टी-कट्टी थी। उसने राकेश रोशन को देखा और झुककर उनके पैर छुए।
फिर मैंने उस लड़के से बीयर पीने के लिए पूछा, लेकिन उसने मना कर दिया और कहा कि इंस्टीट्यूट में इसकी अनुमति नहीं है। फिर उसने अपना परिचय दिया और कहा कि मैं मिथुन चक्रवर्ती हूं। जब राकेश रोशन और प्रमोद खन्ना वहां से चले गए, तो वह मुझे हॉस्टल के कमरे में ले गए। वहां कुछ सीनियर्स पहले से मौजूद थे।
सभी ने मिलकर मेरी रैगिंग की। बाल काट दिए और पूल के पास ले जाकर दौड़ाया भी। मैं बहुत ज्यादा घबरा गया। मैंने उस पल भगवान को याद किया। मुझे लगा कि मैं फंस गया हूं। गड़बड़ हो गई है। मैं पछता रहा था। रोने लगा और कहने लगा कि मुझे दिल्ली वापस जाना है। मैं एक्टर नहीं बनना चाहता। मुझे माफ कर दो। हालांकि इसके बाद मिथुन चक्रवर्ती ने आगे आकर मेरी मदद की। उन्होंने सीनियर्स से कहा कि बात को यहीं खत्म किया जाए।

स्ट्रगल के दिनों में विनोद खन्ना के बंगले में रहे
जब शक्ति पुणे के FTII में पढ़ाई कर रहे थे, तभी एक दिन निर्देशक अर्जुन हिंगोरानी क्लास लेने आए। उन्होंने वहीं पर शक्ति को अपनी फिल्म ‘खेल खिलाड़ी का’ के लिए ऑफर दे दिया। उन्होंने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया और यहीं से उनके एक्टिंग करियर की शुरुआत हो गई।
कुछ ही समय बाद उन्होंने FTII से अपनी पढ़ाई पूरी कर ली और फिर मुंबई आ गए। शुरुआत में वे सांताक्रुज इलाके में एक पीजी में रहने लगे, लेकिन किस्मत हमेशा उनके साथ रही। जैसे ही विनोद खन्ना को यह पता चला कि शक्ति कपूर पीजी में रह रहे हैं, उन्होंने तुरंत उन्हें फोन किया और कहा तुम पीजी में मत रहो, मेरे बंगले में आकर रहो।
इसके बाद शक्ति कपूर लगभग चार साल तक विनोद खन्ना के बंगले में रहे। इस दौरान उन्होंने मॉडलिंग भी शुरू कर दी और इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए। शक्ति कपूर दो दिग्गज अभिनेताओं डेनी डेंजोंगपा और रंजीत के बहुत बड़े प्रशंसक थे।
खासकर रंजीत ने शक्ति कपूर के करियर में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने ही उन्हें फिल्म ‘दरवाजा’ दिलवाई थी। दोनों एक साथ स्ट्रगल भी करते रहे और इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए कड़ी मेहनत की।
एक कार एक्सीडेंट ने फिल्मी दुनिया में बदल दी किस्मत
जैसे ही शक्ति कपूर को मॉडलिंग से पैसे मिले तो उन्होंने 11 हजार रुपए में एक फिएट कार खरीद ली। इसी कार से वह शूटिंग पर जाया करते थे। एक दिन जब वह शूटिंग के लिए जा रहे थे, तो उनकी कार का एक्सीडेंट हो गया। कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। गुस्से में शक्ति कपूर कार से बाहर निकले। दूसरी कार से जो व्यक्ति बाहर निकला, उसे देखकर शक्ति हैरान रह गए, क्योंकि वह और कोई नहीं बल्कि मशहूर अभिनेता फिरोज खान थे।
यह देख कर शक्ति कपूर हक्का-बक्का रह गए और तुरंत माफी मांगने लगे। बातचीत के दौरान उन्होंने फिरोज खान को अपने बारे में भी बताया। इसके बाद दोनों वहां से निकल गए। शाम को शक्ति अपने करीबी केके शुक्ला के घर पहुंचे। शुक्ला की पत्नी, शक्ति की मुंहबोली बहन थीं, इस कारण आपसी संबंध पारिवारिक जैसे थे।
बातचीत के दौरान केके शुक्ला ने कहा, मैं एक फिल्म में तुम्हारे लिए रोल की बात करने ही वाला था। फिरोज उस भूरी आंखों वाले लड़के की तलाश कर रहे हैं, जो गाड़ी से गुस्से में बाहर निकला था। उसके चेहरे और आंखों में एक खास किस्म का विलेन वाला तेज था।
यह सुनकर शक्ति कपूर खुशी से चिल्ला उठे और कहा, मैं ही वो लड़का हूं जिससे आज फिरोज खान की कार का एक्सीडेंट हुआ था। इसके बाद शुक्ला ने तुरंत फिरोज खान को कॉल करके शक्ति कपूर के बारे में बताया। इस तरह एक साधारण-सा कार एक्सीडेंट शक्ति कपूर के करियर का टर्निंग पॉइंट बन गया।
उन्होंने 1980 में आई फिरोज खान की सुपरहिट फिल्म ‘कुर्बानी’ में विलेन का किरदार निभाया। इसके बाद दोनों साथ में कच्चे हीरे, जांबाज और दो वक्त की रोटी जैसी कई फिल्मों में नजर आए।

80 के दशक में विलेन के किरदारों में शक्ति कपूर का कोई मुकाबला नहीं था।
फिल्म के सेट पर पड़े तीन थप्पड़, फिल्म इंडस्ट्री छोड़ना चाहते थे
शक्ति कपूर लगातार विलेन का किरदार निभा रहे थे। उन्हें उसी तरह के रोल ऑफर हो रहे थे। ऐसे में उन्हें लगा कि कहीं वह टाइपकास्ट न हो जाएं। तब उन्होंने अपना जॉनर बदला और कॉमेडी में हाथ आजमाने का फैसला किया।
लेकिन यहां भी एक वक्त ऐसा आया जब उन्हें लगा कि अब फिल्म इंडस्ट्री छोड़ देनी चाहिए। दरअसल, फिल्म ‘मवाली’ की शूटिंग के दौरान उन्होंने अरुणा ईरानी, कादर खान और जीतेंद्र के साथ काम किया। शूटिंग के पहले दिन जब पहला शॉट हुआ, तो अरुणा ईरानी ने उन्हें एक जोरदार चांटा मारा। दूसरे शॉट में जीतेंद्र ने थप्पड़ जड़ दिया और तीसरे शॉट में कादर खान ने भी वही किया।
तीन थप्पड़ खाकर शक्ति कपूर परेशान हो गए। वे फाइट मास्टर वीरू देवगन (अजय देवगन के पिता) के पास गए और बोले, मैं टॉप का विलेन हूं, लेकिन यहां तो मुझे थप्पड़ पर थप्पड़ पड़ रहे हैं। मुझे ये फिल्म नहीं करनी है। इतना ही नहीं, उनके मन में इंडस्ट्री छोड़ने का ख्याल भी आया।
तब उन्हें समझाया गया कि ये एक बहुत अच्छी फिल्म है। यह एक तेलुगु फिल्म की रीमेक है और उनका किरदार काफी दमदार है। इसके बाद शक्ति कपूर दोबारा सेट पर लौटे और परफेक्ट शॉट दिया। फिल्म सुपरहिट रही और लोगों को उनका रोल बेहद पसंद आया। इसी फिल्म के बाद कादर खान और शक्ति कपूर की जोड़ी हिट हो गई।

लता मंगेशकर की भांजी से भागकर की शादी
शिवांगी कोल्हापुरी 80 के दशक की मशहूर अभिनेत्री रही हैं। वह स्वर कोकिला लता मंगेशकर की भांजी हैं। 1980 में रिलीज हुई फिल्म किस्मत की शूटिंग के दौरान शिवांगी और शक्ति कपूर की पहली मुलाकात हुई थी। पहले दोनों के बीच दोस्ती हुई, जो धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। शिवांगी, शक्ति कपूर से 12 साल छोटी हैं और यही उम्र का अंतर उनके माता-पिता की नाराजगी की एक बड़ी वजह बना।
शिवांगी के माता-पिता इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे। उन्होंने बेटी को घर में बंद तक कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद दोनों ने 1982 में घर से भागकर शादी कर ली। टाइमआउट विद अंकित पॉडकास्ट में शक्ति कपूर ने बताया कि उनके और शिवांगी के बीच सांस्कृतिक अंतर भी था, जिससे शिवांगी के माता-पिता असहज थे।
इसके अलावा फिल्मों में शक्ति कपूर के निभाए गए निगेटिव किरदारों की वजह से उन्हें यह गलतफहमी थी कि वह असल जिंदगी में भी वैसे ही हैं। हालांकि बेटे सिद्धांत के जन्म के बाद शिवांगी के माता-पिता ने आखिरकार इस रिश्ते को स्वीकार कर लिया। और फिर 1987 में दोनों की बेटी श्रद्धा कपूर का जन्म हुआ।

शक्ति कपूर पत्नी शिवांगी, बेटी श्रद्धा और बेटे सिद्धांत कपूर के साथ।
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