
दिल्ली से देहरादून का सफर अब सिर्फ तेज ही नहीं, बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी सुरक्षित होने जा रहा है। विकास और वन्यजीव संरक्षण को साथ लेकर चलने की मिसाल पेश करते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के गणेशपुर-देहरादून सेक्शन को खास तौर पर इस तरह डिजाइन किया है कि ऊपर से गाड़ियां दौड़ेंगी और नीचे से हाथी व अन्य वन्यजीव सुरक्षित तरीके से गुजर सकेंगे।
वन्यजीवों के लिए विशेष इंतजाम
इस कॉरिडोर में समर्पित एनिमल क्रॉसिंग, अंडरपास, प्रोटेक्टिव फेंसिंग और ईको-सेंसिटिव प्लानिंग को शामिल किया गया है। खास बात यह है कि एशिया का सबसे लंबा 12 किलोमीटर का वाइल्डलाइफ कॉरिडोर भी इसी एक्सप्रेसवे का हिस्सा है। यह एलिवेटेड स्ट्रक्चर एक ओर राजाजी राष्ट्रीय उद्यान से सटा है, जहां हाथी, हिरण और कई दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं और दूसरी ओर रिस्पना व बिंदाल नदियां बहती हैं। करीब 1200 करोड़ रुपये की लागत से बना यह एलिवेटेड हिस्सा 575 पिलरों पर टिका है, जिससे जानवरों की आवाजाही बाधित न हो।
सफर होगा आधा, समय बचेगा दोगुना
6-लेन का यह एक्सप्रेसवे दिल्ली और उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के बीच यात्रा समय को मौजूदा 6.5 घंटे से घटाकर सिर्फ 2.5 से 3 घंटे कर देगा। कारों के लिए अधिकतम गति सीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटा और भारी वाहनों के लिए 80 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। करीब 12,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा यह प्रोजेक्ट चार हिस्सों में बंटा है और दिल्ली में अक्षरधाम के पास से शुरू होकर बागपत, शामली, सहारनपुर होते हुए देहरादून तक जाएगा।
सुरंग, अंडरपास और आधुनिक ढांचा
इस एक्सप्रेसवे में 340 मीटर लंबी डेटकाली सुरंग, 16 एंट्री-एग्जिट प्वाइंट, 113 अंडरपास और 5 रेलवे ओवरब्रिज बनाए गए हैं। सहारनपुर का 80 किमी हिस्सा और 12 किमी एलिवेटेड रोड पहले ही पूरा हो चुका है और कुछ हिस्सों पर यातायात शुरू भी हो गया है। आपको बता दें कि 2020 में स्वीकृत इस परियोजना की आधारशिला दिसंबर 2021 में रखी गई थी।






































