
कांग्रेस नेता वैश्ना सुरेश
केरल स्थानीय निकाय चुनाव में कांग्रेस की युवा नेता वैश्ना सुरेश ने शानदार जीत दर्ज की है। उनकी जीत इसलिए अहम है क्योंकि उनका नाम ही वोटर लिस्ट से हटा दिया गया था, मगर उन्होंने हार नहीं मानी।उन्होंने केरल हाईकोर्ट तक अपनी लड़ाई लड़ी और आखिरकार अब चुनाव में शानदार जीत से हलचल मचा दी है। 32 साल की वैश्ना सुरेश मूल रूप से तिरुवनंतपुरम की रहने वाली हैं और उन्होंने यूडीएफ यानी संयुक्त डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की ओर से थिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन के मुट्टाडा वार्ड से चुनाव लड़ा और सीपीएम की मजबूत सीट को छीन ली। उन्होंने करीब 300 से अधिक वोटों के अंतर से सीपीएम कैंडिडेट को हराया है।
चुनाव में मिली जीत के बाद वैश्ना एस एल ने संवाददाताओं से कहा कि यह ‘लोकतंत्र की जीत’ है और कांग्रेस ने पहले ही कहा था कि ‘सच की ही जीत होगी। यह हमारे लिए गर्व और खुशी की बात है। लोग जानते हैं कि हमने कितनी मेहनत की है।’
वैश्ना सुरेश ने अपना नाम मतदाता सूची से हटाने से संबंधित राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) का नोटिस मिलने के बाद केरल उच्च न्यायालय का रुख किया था और इसके बाद हाई कोर्ट ने एसईसी को उनके दावे की पुनः समीक्षा करने का निर्देश दिया। फिर एसईसी ने सुनवाई की और उनका नाम मतदाता सूची में डाल दिया गया। कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि वैश्ना का नाम मतदाता सूची से हटाने के पीछे राजनीतिक साजिश थी।
वैश्ना सुरेश की यह जीत क्यों है खास?
कांग्रेस नेता वैश्ना की यह जीत न केवल राजनीतिक बल्कि कानूनी लड़ाई की भी जीत है, क्योंकि चुनाव से ठीक पहले उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया था, मगर उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी लड़ाई लड़ी और वह हाईकोर्ट पहुंच गईं और इसके बाद हाईकोर्ट ने वैश्ना सुरेश के पक्ष में फैसला दिया और तब जाकर राज्य चुनाव आयोग (SEC) ने उनके वोटर लिस्ट को फिर से बहाल किया। यानी कोर्ट के दखल के बाद ही उनका नाम वापस बहाल हो पाया था।
कौन हैं कांग्रेस नेता वैश्ना सुरेश?
वैश्ना सुरेश पेशे से एक सामाजिक कार्यकर्ता और कांग्रेस की सक्रिय सदस्य हैं। उन्होंने राजनीति में प्रवेश युवा कांग्रेस के माध्यम से किया और स्थानीय मुद्दों जैसे पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और शहरी विकास पर फोकस किया है और इन मुद्दों को लेकर ग्राउंड पर कार्य करती रहती हैं।








































