
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने मंगलवार को कहा कि उसे रूस से पिछले 3 हफ्तों से तेल का एक भी बैरल नहीं मिला है। कंपनी ने बताया कि जनवरी में रूस से तेल मिलने की उम्मीद नहीं है। रिलायंस ने पिछले साल 20 नवंबर को कहा था कि उसने यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों का अनुपालन करने के लिए गुजरात के जामनगर स्थित अपनी निर्यात-विशिष्ट रिफाइनरी में रूसी कच्चे तेल का इस्तेमाल बंद कर दिया है। इससे पहले रिलायंस, भारत में रूसी तेल की सबसे बड़ी खरीदार थी, जिसे वो जामनगर स्थित अपने विशाल रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में प्रोसेस करके पेट्रोल और डीजल बनाती थी।
जामनगर से यूरोपीय संघ, अमेरिका भेजा जाता है फ्यूल
जामनगर के इस कॉम्प्लेक्स में दो रिफाइनरियां हैं। एक SEZ यूनिट है जहां से यूरोपीय संघ, अमेरिका और अन्य बाजारों में फ्यूल एक्सपोर्ट किया जाता है और एक पुरानी यूनिट जो मुख्य रूप से घरेलू बाजार की जरूरतों को पूरा करती है। यूरोपीय संघ, रिलायंस के लिए एक बड़ा बाजार है और उसने रूस के ऊर्जा राजस्व को लक्षित करते हुए व्यापक प्रतिबंध लगाए हैं, जिनमें रूसी कच्चे तेल से उत्पादित ईंधन के आयात और बिक्री पर प्रतिबंध लगाने वाले उपाय भी शामिल हैं। इन शर्तों का पालन करने के लिए, रिलायंस ने अपने सिर्फ निर्यात के लिए बने SEZ रिफाइनरी में रूसी कच्चे तेल की प्रोसेसिंग बंद कर दी थी।
रिलायंस ने ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट को बताया झूठ
मंगलवार को रिलायंस ने ‘ब्लूमबर्ग’ की उस रिपोर्ट को ‘‘पूरी तरह से झूठा’’ बताया, जिसमें दावा किया गया था कि ‘‘रूसी तेल से लदे तीन जहाजों को रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी के लिए तैयार किया जा रहा है।’’ रिलायंस ने बयान में कहा, ‘‘ रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी को पिछले 3 हफ्तों से रूसी तेल की कोई खेप नहीं मिली है और जनवरी में भी रूसी कच्चे तेल की कोई सप्लाई मिलने की उम्मीद नहीं है।’’
रिपोर्ट में क्या कहा गया था
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में ‘केप्लर’ के हवाले से कहा गया था कि करीब 22 लाख बैरल यूराल (रूसी कच्चे तेल का एक प्रकार) से लदे कम से कम तीन टैंकर सिक्का बंदरगाह की ओर जा रहे थे, जिसके माध्यम से जामनगर रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स अपने कच्चे तेल के आयात का एक बड़ा हिस्सा प्राप्त करता है। सिक्का बंदरगाह का इस्तेमाल रिलायंस के अलावा अन्य कंपनियां भी करती हैं। उद्योग जगत से जुड़े सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में उल्लिखित तीनों टैंकर संभवतः भारत पेट्रोलियम (BPCL) की बीना रिफाइनरी के लिए थे, रिलायंस के लिए नहीं।







































