नई दिल्ली: पूरी दुनिया में एयर क्वालिटी दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। वायु गुणवत्ता की गिरावट के मामले में दक्षिण एशिया एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। स्विस एयर क्वालिटी टेक्नोलॉजी कंपनी ‘आईक्यूएयर’ (IQAir) द्वारा जारी 8वीं विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट के मुताबिकपाकिस्तान दुनिया का सबसे प्रदूषित देश घोषित किया गया है। वहीं बांग्लादेश इस लिस्ट में दूसरे स्थान पर है जबकि भारत दुनिया का छठा सबसे प्रदूषित देश है।
आंकड़े काफी चिंताजनक
रिपोर्ट में 143 देशों, क्षेत्रों और भूभागों के 9,446 शहरों में स्थित निगरानी स्टेशन से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। इस रिपोर्ट के आंकड़े काफी चिंताजनक हैं, क्योंकि दुनिया के 25 सबसे प्रदूषित शहरों में से अधिकांश भारत, पाकिस्तान और चीन में स्थित हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि दुनिया के चार सबसे प्रदूषित शहरों में से तीन भारत में हैं।
दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर कौन?
शहरों की बात करें तो उत्तर प्रदेश का लोनी दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर पाया गया जबकि दूसरे स्थान पर चीन का होता है। तीसरे स्थान पर मेघालय के बर्नीहाट और राजधानी दिल्ली इस लिस्ट में चौथे स्थान पर है जबकि पाकिस्तान का फैसलाबाद पांचवें नंबर पर है।
13 देश ही मानकों पर खरे उतरे
दुनिया के सबसे प्रदूषित देशों में चीन 20वें स्थान पर है, जबकि अमेरिका 120वें स्थान पर और ब्रिटेन 110वें स्थान पर है। रिपोर्ट के अनुसार, केवल 13 देश या क्षेत्र – फ्रेंच पॉलिनेशिया, प्यूर्टो रिको, यूएस वर्जिन आइलैंड्स, बारबाडोस, न्यू कैलेडोनिया, आइसलैंड, बरमूडा, रीयूनियन, एंडोरा, ऑस्ट्रेलिया, ग्रेनाडा, पनामा और एस्टोनिया – विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के वार्षिक औसत पीएम 2.5 दिशानिर्देश को पूरा कर पाये हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है, ”143 देशों या क्षेत्रों में से 130 (91 प्रतिशत) विश्व स्वास्थ्य संगठन के वार्षिक औसत पीएम 2. 5 दिशानिर्देश को पूरा नहीं कर पाये हैं। सबसे प्रदूषित पांच देश पाकिस्तान, बांग्लादेश, ताजिकिस्तान, चाड और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य हैं। दुनिया के 25 सबसे प्रदूषित शहर भारत, पाकिस्तान और चीन में हैं, जिनमें से चार सबसे प्रदूषित शहरों में से तीन भारत में हैं।”
कौन है दुनिया का सबसे साफ शहर?
दक्षिण अफ्रीका का न्यूबॉउटविल शहर दुनिया का सबसे स्वच्छ शहर है, जहां पीएम 2.5 की वार्षिक औसत सांद्रता 1.0 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर है। रिपोर्ट में कहा गया है,” 2025 में, जंगल की आग की घटनाओं ने उन क्षेत्रों को बुरी तरह प्रभावित किया, जहां ऐतिहासिक रूप से पीएम2.5 का स्तर अपेक्षाकृत कम रहा है। परिणामस्वरूप, 2025 में वैश्विक शहरों में से केवल 14 प्रतिशत ही डब्ल्यूएचओ के वार्षिक पीएम2.5 दिशानिर्देश को पूरा कर पाए, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 17 प्रतिशत था।”






































