
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल यानी 21 अगस्त (शुक्रवार) को बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग 31 पर 8.15 किलोमीटर लंबे औंटा-सिमरिया पुल परियोजना का उद्घाटन करेंगे। इस परियोजना में 1.86 किलोमीटर लंबा 6-लेन गंगा नदी पर बना पुल भी शामिल है। इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत 1,870 करोड़ रुपये से अधिक है। यह पुल पटना के मोकामा और बेगूसराय के बीच सीधे संपर्क स्थापित करेगा। इससे बिहार की कनेक्टिविटी में और सुधार होगा। यह नया पुल पुराने 2-लेन रेलवे-सड़क पुल “राजेंद्र सेतु” के समानांतर बनाया गया है, जो वर्तमान में जर्जर हालत में है।
नए पुल के उद्घाटन से आसपास के क्षेत्रों, विशेषकर उत्तर बिहार, में आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, जो आवश्यक कच्चे माल की प्राप्ति के लिए दक्षिण बिहार और झारखंड पर निर्भर हैं। इससे प्रसिद्ध तीर्थस्थल सिमरिया धाम तक बेहतर संपर्क सुविधा भी उपलब्ध होगी, जो प्रसिद्ध कवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मस्थली भी है।
पीएम मोदी का बिहार दौरा
पीएम मोदी शुक्रवार को सुबह लगभग 11 बजे बिहार के गया में लगभग 13,000 करोड़ रुपये की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे। पीएम दो ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर उपस्थित जनसमूह को भी संबोधित करेंगे। इसके बाद, वे गंगा नदी पर औंटा-सिमरिया पुल परियोजना का दौरा करेंगे और उसका उद्घाटन करेंगे। प्रधानमंत्री लगभग 1,900 करोड़ रुपये की लागत से राष्ट्रीय राजमार्ग-31 के बख्तियारपुर से मोकामा तक चार लेन वाले खंड का भी उद्घाटन करेंगे, जिससे भीड़भाड़ कम होगी, यात्रा का समय कम होगा और यात्रियों के आवागमन एवं माल ढुलाई में आसानी होगी। साथ ही बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग-120 के बिक्रमगंज-दावथ-नवानगर-डुमरांव खंड के पक्के शोल्डर सहित दो लेन के अपग्रेडेशन से ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क सुविधा में सुधार होगा, जिससे स्थानीय आबादी के लिए नए आर्थिक अवसर उपलब्ध होंगे।
100 किलोमीटर से अधिक की अतिरिक्त दूरी होगी कम
राजेंद्र सेतु की खराब स्थिति के कारण भारी वाहन अधिक दूरी तय कर पुनः मार्ग बदलने को मजबूर होते थे। नया पुल भारी वाहनों के लिए उत्तर बिहार (बेगूसराय, सुपौल, मधुबनी, पूर्णिया, अररिया आदि) और दक्षिण बिहार (शेखपुरा, नवादा, लखीसराय आदि) के बीच यात्रा में 100 किलोमीटर से अधिक की अतिरिक्त दूरी को कम करेगा। इससे क्षेत्र के अन्य हिस्सों में ट्रैफिक जाम की समस्या भी कम होगी, क्योंकि भारी वाहन अब लंबा चक्कर नहीं लगाएंगे। इस पुल से आसपास के इलाकों, विशेष रूप से उत्तर बिहार के आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा, जो कच्चे माल की आपूर्ति के लिए दक्षिण बिहार और झारखंड पर निर्भर हैं।







































