
बंगाल में SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश।
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज एक बड़ा फैसला दिया। कोर्ट ने कहा कि बंगाल के SIR प्रोसेस में अब ओडिशा और झारखंड के ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को भी शामिल किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन अफसरों को कम से कम तीन साल के काम का अनुभव होना चाहिए। दरअसल कुछ ही दिन पहले कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को SIR प्रोसेस में लगाने को कहा था, लेकिन कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा कि इस काम में ढाई सौ अफसरों को लगाया गया है, लेकिन करीब 50 लाख फॉर्म पेंडिंग हैं। अगर हर एक जज रोज़ाना ढाई सौ फॉर्म्स की जांच करेगा, तब भी पूरा काम खत्म होने में करीब 80 दिन लग जाएंगे।
तृणमूल कांग्रेस फैसले से खुश
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा और झारखंड के ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को भी शामिल करने के आदेश दिए। कोर्ट ने कहा कि अब आधार कार्ड, हाईस्कूल का एडमिट कार्ड और सर्टिफिकेट भी मान्य दस्तावेज़ होंगे। 14 फरवरी से पहले जिन्होंने भी ऑनलाइन या फिजिकल रूप में दस्तावेज़ जमा कराए, उन्हें स्वीकार करना होगा। कोर्ट के इस फैसले से तृणमूल कांग्रेस खुश है। कुणाल घोष ने कहा कि ममता बनर्जी तो पहले ही कह रही थीं कि इतनी जल्दी काम नहीं होगा, लेकिन चुनाव आयोग की जिद की वजह से कई BLO को अपनी जान गंवानी पड़ी और काम भी नहीं हुआ।
फाइनल रोल के लिए 28 फरवरी डेडलाइन
वहीं बीजेपी भी इस फैसले को अपने हिसाब से देख रही है। बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि दूसरे राज्यों से ज्यूडिशियल ऑफिसर्स लाने का मतलब ये है कि कोर्ट को बंगाल सरकार पर भरोसा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने फाइनल रोल के पब्लिकेशन के लिए 28 फरवरी की डेडलाइन तय की है, लेकिन 28 फरवरी के बाद भी सप्लीमेंट्री लिस्ट को पब्लिश करने की मंजूरी होगी। दोनों लिस्ट को जोड़कर फाइनल इलेक्टोरल लिस्ट पब्लिश की जाएगी। उम्मीद की जानी चाहिए अब बंगाल में SIR पर चल रही सियासत पर विराम लगेगी और इलेक्शन कराने का रास्ता साफ हो जाएगा।
यह भी पढ़ें-







































