
कांग्रेस नेता शशि थरूर।
बिहार में NDA की लैंडस्लाइड विक्ट्री हुई है, पूरा बिहार भगवामय हो गया है। NDA की आंधी में महागठबंधन उड़ गया है। रुझानों में NDA को 200 से ज्यादा सीटें मिलती हुई दिख रही हैं। बिहार में पहली बार बिहार में किसी गठबंधन को इतनी ज्यादा सीटें मिली हैं। बड़ी बात ये है कि बिहार में देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस 8वें नंबर की पार्टी बन गई है। बिहार में कांग्रेस को सिर्फ एक सीट पर आगे है और वो है- किशनगंज सीट। चुनाव नतीजों पर बात करते हुए कांग्रेस नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने कहा कि उन्हें बिहार चुनाव में प्रचार के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस अपनी हार के कारणों की जांच करेगी।
हार के लिए किसे ठहराया जिम्मेदार?
बिहार चुनाव के नतीजों के बाद पत्रकारों से बातचीत में थरूर ने कहा कि पार्टी की जिम्मेदारी है कि वह इस हार के कारणों का विस्तार से अध्ययन करे। उन्होंने कहा, ‘‘याद रखें हम गठबंधन में वरिष्ठ सहयोगी नहीं थे और राजद को भी अपने प्रदर्शन पर ध्यान देना होगा।’’ उनके अनुसार, बिहार जैसे जनादेश में पार्टी के समग्र प्रदर्शन की जांच करना महत्वपूर्ण है।
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अपनी पार्टी को क्या नसीहत दी?
थरूर ने कहा कि चुनाव कई कारकों पर निर्भर करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जाहिर है जनता का मूड भी मायने रखता है। संगठन की ताकत और कमजोरियों पर सवाल हैं। संदेश देने का सवाल है। इन मुद्दों पर गौर करना होगा।’’ थरूर ने कहा कि नतीजों का गहन विश्लेषण किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा, ‘‘मैं वहां नहीं था और मुझे बिहार में प्रचार के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था। इसलिए मैं अपने निजी अनुभव से ज्यादा कुछ नहीं कह सकता। जो लोग वहां थे, वे निश्चित रूप से नतीजों का अध्ययन करेंगे।’’
कांग्रेस के सीनियर नेता ने की थरूर की आलोचना
इस बीच, कांग्रेस के सीनियर नेता एम एम हसन ने पार्टी में वंशवाद की राजनीति के खिलाफ अपने हालिया लेख के लिए थरूर की तीखी आलोचना की। एक अन्य कार्यक्रम में हसन ने कहा कि सांसद नेहरू परिवार के समर्थन से राजनीति में आए और उन्हीं की बदौलत उन्हें सारे पद और प्रसिद्धि मिली। अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान ‘प्रोजेक्ट सिंडिकेट’ के लिए हाल में लिखे एक लेख में, तिरुवनंतपुरम के सांसद ने कहा था कि राजनीतिक परिदृश्य में वंशवादी राजनीति भारतीय लोकतंत्र के लिए ‘गंभीर खतरा’ है।
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