पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर अब विश्व प्रसिद्ध बीकानेरी नमकीन के निर्यात पर भी पड़ने लगा है। व्यापारियों को इस संघर्ष के कारण खाड़ी और यूरोपीय देशों में भुजिया, पापड़ और मसालों जैसा सामान भेजने में काफी दिक्कतें हो रही हैं। बीकानेर अपने नमकीन उत्पादों के लिए विख्यात है और यहां से खाड़ी व यूरोप के देशों में बड़ी मात्रा में नमकीन, मसाले और दूसरे सामान निर्यात होते हैं। निर्यातकों ने बताया कि युद्ध की वजह से सामान भेजने में देरी हो रही है। साथ ही माल ढुलाई की लागत बढ़ी है और कंटेनरों की भी कमी है।
महंगा हुआ कच्चा माल और ढुलाई
भीखाराम ग्रुप से जुड़े नमकीन कारोबारी आशीष अग्रवाल ने कहा कि कच्चे माल और ढुलाई आदि की बढ़ती लागत से उद्योग को नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा, “युद्ध की वजह से माल भाड़े में भारी बढ़ोतरी हुई है और कच्चे माल की कीमतें भी बढ़ रही हैं।’ उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने में खाद्य तेल की कीमत में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ रहा है।” निर्यातकों के अनुसार कंटेनरों का आवागम काफी धीमा हुआ है। जो खेप पहले लगभग 30 दिन में पहुंच जाती थी, उसमें अब 60 दिन तक का समय लग रहा है क्योंकि युद्ध के चलते उसे लंबे और सुरक्षित रास्तों से भेजा जा रहा है।
आयात और निर्यात दोनों प्रभावित
एक निर्यातक राजेश जिंदल ने कहा कि आने वाले और जाने वाले दोनों तरह के माल की खेप में देरी हो रही है। इससे व्यापारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “आने वाला और जाने वाला, दोनों तरह का माल देर से पहुंच रहा है और लागत में काफी बढ़ोतरी हुई है। अरब देशों में बीकानेरी नमकीन (स्नैक्स) और मसालों की मांग अब भी काफी ज़्यादा है, लेकिन आपूर्ति ढांचे में आई रुकावटों की वजह से नुकसान हो रहा है।” व्यापारियों ने बताया कि निर्यात के साथ साथ पाम ऑयल और सोयाबीन जैसे जरूरी कच्चे माल के आयात पर भी असर पड़ा है।
रास्ते में फंसा हुआ है करोड़ों रुपये का माल
पेट्रोलियम की बढ़ती कीमतों से पैकेजिंग की लागत को 30-40 प्रतिशत तक बढ़ी है जिससे जिससे निर्माताओं के लिए लागत अधिक आ रही है। निर्यातकों ने कहा कि यह समय नमकीन के व्यापार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि निर्यात के ‘व्यस्ततम समय’ के लिए तैयारियां आमतौर पर इसी समय शुरू हो जाती हैं। उत्पादों की आपूर्ति के समय को लेकर बनी अनिश्चितता और बढ़े माल भाड़े की वजह से व्यापारी अपनी रणनीति पर पुनर्विचार को मजबूर हैं। उद्योग जगत के अनुमानों के अनुसार बीकानेर से हर महीने भुजिया, पापड़ और नमकीन के 15 से 20 कंटेनर निर्यात किए जाते हैं। दूसरे सामान के लगभग 60 कंटेनर भी बाहर भेजे जाते हैं। करोड़ों रुपये की खेप बंदरगाहों पर या रास्ते में अटकी हुई हैं।






































