
चीन ने भारत को उर्वरकों और दुर्लभ मृदा खनिजों की आपूर्ति से जुड़े प्रतिबंधों को हटाने का फैसला किया है आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को ये जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ इस मुद्दे से जुड़ी पूरी जानकारी साझा की है। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत के दौरान भारत द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद चीन ने ये कदम उठाया है। चीन का ये फैसला निश्चित रूप से भारत के लिए एक बड़ी राहत की बात है। चीन के विदेश मंत्री वांग दो दिनों की यात्रा पर भारत आए हैं। सूत्रों ने बताया कि चीन ने भारत की तीन प्रमुख चिंताओं का समाधान करने का वादा किया है।
इलेक्ट्रिक वाहन, ड्रोन और बैटरी स्टोरेज के लिए काफी अहम है मृदा खनिज
एक सूत्र ने पीटीआई को बताया, ‘‘चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने विदेश मंत्री जयशंकर को आश्वासन दिया है कि भारत की उर्वरकों, दुर्लभ मृदा खनिजों और सुरंग खोदने वाली मशीनों की जरूरतों को चीन पूरा करेगा।’’ एस. जयशंकर ने सोमवार को बिना कोई डिटेल्स बताए कहा था कि उन्होंने वांग यी के साथ हुई मीटिंग में भारत की‘‘विशेष चिंताओं’’ का उल्लेख किया, जिन्हें उन्होंने पिछले महीने अपनी बीजिंग यात्रा के दौरान भी उठाया था। दुर्लभ मृदा खनिजों को उच्च-स्तरीय तकनीकी उत्पादों जैसे- इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), ड्रोन और बैटरी स्टोरेज के लिए काफी अहम और महत्वपूर्ण माना जाता है।
महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन में एक प्रमुख सप्लायर रहा है चीन
चीन वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन में एक प्रमुख सप्लायर रहा है। बैठक में अपनी शुरुआती टिप्पणियों में विदेश मंत्री ने ये भी कहा कि भारत और चीन को एक कठिन दौर के बाद संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए स्पष्ट और रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
चीन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से कृषि और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर बुरा असर
बताते चलें कि भारत ने चीन के सामने अपनी चिंताओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त किया था क्योंकि उर्वरकों पर अचानक प्रतिबंध लगाए जाने से रबी सीजन में डाइ-अमोनियम फॉस्फेट की उपलब्धता काफी प्रभावित हुई थी। इसी तरह, उसने भारत में प्रमुख इंफ्रा प्रोजेक्ट्स के लिए टनल बोरिंग मशीनों की शिपमेंट पर रोक लगा दी थी। इसके अलावा, ऑटो और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री ने दुर्लभ मृदा चुम्बकों और खनिजों पर चीन द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की थीं, जिससे उत्पादन पर बुरा प्रभाव पड़ने की आशंका थी। ये फैसले दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के कारण सुरक्षा कारणों से लिए गए थे।
पीटीआई इनपुट्स के साथ







































