
इस साल मानसून सामान्य से नौ दिन ज्यादा लंबा रहा
24 मई को देश में दस्तक देने वाले मानसून ने 15 अक्टूबर को विदाई ली। हालांकि, इसके बाद भी देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी है। इस बार मानसून सामान्य से एक दिन बाद विदा हुआ, लेकिन बारिश सामान्य से 8 फीसदी ज्यादा हुई। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार 2009 के बाद से इस साल मानसून का भारत में सबसे जल्दी आगमन हुआ था। यह 2009 में 23 मई को भारत पहुंचा था।
मानसून ने आठ जुलाई की सामान्य तिथि से नौ दिन पहले पूरे देश को कवर कर लिया। मानसून पूरे भारत में 2020 के बाद सबसे जल्दी पहुंचा है। मानसून ने 2020 में 26 जून तक पूरे देश को कवर कर लिया था। मानसून आमतौर पर एक जून तक केरल में प्रवेश करता है और आठ जुलाई तक पूरे देश को कवर कर लेता है। यह 17 सितंबर के आसपास उत्तर-पश्चिम भारत से वापस जाना शुरू करता है और 15 अक्टूबर तक पूरी तरह से चला जाता है।
इस साल कितनी बारिश हुई?
भारत में 30 सितंबर तक मानसून के दौरान चार महीने में सामान्य 868.6 मिमी के मुकाबले 937.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई जो आठ प्रतिशत अधिक है। आईएमडी ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि उत्तर-पश्चिम के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर भारत के अधिकतर क्षेत्रों में अक्टूबर से दिसंबर तक के मानसून के बाद के मौसम के दौरान सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है। आईएमडी महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि जून-सितंबर के दौरान हुई भरपूर बारिश के बाद अक्टूबर में वर्षा सामान्य से 15 प्रतिशत अधिक होने की संभावना है।
सूखे रहे पूर्वोत्तर राज्य
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 1089.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य बारिश 1367.3 मिलीमीटर से 20 प्रतिशत कम है। महापात्र ने कहा, ‘‘इस मानसून में पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश 1901 के बाद से दूसरी बार सबसे कम रही। इस क्षेत्र में मानसून के दौरान सबसे कम बारिश (1065.7 मिलीमीटर) 2013 में दर्ज की गई थी। अध्ययनों से पता चलता है कि पिछले दो दशकों में इस क्षेत्र में वर्षा में कमी आई है।” उन्होंने कहा कि पश्चिमोत्तर भारत में 747.9 मिलीमीटर बारिश हुई जो सामान्य बारिश से 27.3 प्रतिशत अधिक है।
पंजाब में बाढ़ से नुकसान
महापात्र ने कहा कि यह 2001 के बाद से सबसे अधिक और 1901 के बाद से छठी सबसे अधिक बारिश है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के सभी जिलों में जून, अगस्त और सितंबर में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई। पंजाब में दशकों की सबसे भीषण बाढ़ आई तथा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड एवं जम्मू कश्मीर में बादल फटने, अचानक बाढ़ और भूस्खलन की खबरें आईं, जिससे बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा और लोग विस्थापित हुए।
क्या रही ज्यादा बारिश की वजह?
आईएमडी ने अतिरिक्त बारिश का श्रेय सक्रिय मानसून को दिया जिससे लगातार पश्चिमी विक्षोभों का समर्थन मिला और क्षेत्र में बारिश में वृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि मध्य भारत में 1125.3 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई जो सामान्य बारिश से 15.1 प्रतिशत अधिक है जबकि दक्षिणी प्रायद्वीप में 9.9 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। भारत में जून में सामान्य से 8.9 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई, जुलाई में 4.8 प्रतिशत, अगस्त में 5.2 प्रतिशत तथा सितंबर में 15.3 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई। मानसून कृषि के लिए महत्वपूर्ण है, जिस पर लगभग 42 प्रतिशत आबादी निर्भर है और सकल घरेलू उत्पाद में 18.2 प्रतिशत का योगदान देती है। यह पेयजल और बिजली उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण जलाशयों को भी भरता है।
सामान्य से ज्यादा ठंड के आसार
इस साल अक्टूबर के पहले सप्ताह में ही पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी शुरू हो गई थी। इससे दिल्ली समेत उत्तर भारतीय राज्यों में ठंड का आगमन हो चुका है। इस साल ठंड सामान्य से ज्यादा दिनों तक रहने के आसार हैं। इस दौरान न्यूनतम तापमान भी सामान्य से नीचे जा सकता है। दिल्ली समेत उत्तर भारतीय राज्यों में इस बार की सर्दियां एक दशक में सबसे ठंडी रह सकती हैं। हालांकि, इसमें प्रशांत महासागर से आने वाली हवाएं अहम रोल अदा करेंगी।
बंगाल-तमिलनाडु में भारी बारिश के आसार
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में 28 से 31 अक्टूबर के बीच भारी बारिश के आसार हैं। बंगाल की खाड़ी में गहरे दबाव का क्षेत्र बना था और यह चक्रवात का रूप ले चुका है। इसका असर पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और अन्य पूर्वी राज्यों में देखने को मिलेगा। वहीं, मध्य प्रदेश और अन्य इलाकों में भी बारिश हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार दिसंबर तक अलग-अलग वजहों से देश के अधिकतर हिस्सों में सामान्य से ज्यादा बारिश होगी।







































