
सहकारी हाउसिंग सोसाइटियों के पुनर्विकास को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण और निर्णायक आदेश जारी किया है। महाराष्ट्र के सहकारी आयोग आयुक्त दीपक तावरे ने स्पष्ट किया है कि सहकारी हाउसिंग सोसाइटियों के पुनर्विकास के लिए ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ यानी NOC जारी करने का अधिकार रजिस्ट्रार और उप-रजिस्ट्रार के पास अब नहीं है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, आयुक्त तावरे ने अपने आदेश में साफ किया है कि संबंधित सहकारी हाउसिंग सोसाइटी की आम सभा या जनरल बॉडी ही पुनर्विकास प्रक्रिया में सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है।
निगरानी तक सीमित भूमिका
आयुक्त ने बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर एक रिट याचिका और 2019 के एक सरकारी प्रस्ताव (GR) का हवाला देते हुए कहा कि रजिस्ट्रार और सहकारी सोसाइटियों की भूमिका और कर्तव्य केवल “निगरानी” तक सीमित हैं।
अधिनियम में कोई प्रावधान नहीं
वरिष्ठ अधिकारी ने यह सुनिश्चित किया कि महाराष्ट्र सहकारी समाज अधिनियम, 1960 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो रजिस्ट्रार को किसी भी सहकारी हाउसिंग सोसाइटी के पुनर्विकास के लिए NOC जारी करने का अधिकार देता हो।
आदेश का सीधा प्रभाव
आदेश में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि रजिस्ट्रार और उप-रजिस्ट्रार अब सहकारी सोसाइटियों से पुनर्विकास के लिए NOC हेतु आवेदन नहीं मांगेंगे और न ही उन्हें इस प्रकार के प्रमाण पत्र जारी करने चाहिए। यह फैसला सहकारी हाउसिंग सोसाइटियों को पुनर्विकास की प्रक्रिया में अधिक स्वायत्तता प्रदान करता है और प्रक्रिया को गति देने में मदद कर सकता है, क्योंकि अब उन्हें अनावश्यक प्रशासनिक मंजूरी के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा।






































