
सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों के लिए नया एसओपी जारी की है। अब बड़े वकीलों को किसी भी केस की सुनवाई के दौरान पहले ही बताना होगा कि वह कितनी देर तक दलीलें देंगे। दलीलों के बारे में संक्षिप्त में लिखित जानकारी भी देनी होगी। यह जानकारी अधिकतम पांच पन्ने की हो सकती है। इसकी एक लिखित प्रति दूसरी पार्टी को भी देनी होगी। ऐसा होने पर दोनों पक्ष अपनी दलीलों के साथ पूरी तरह तैयार होंगे। इससे अदालत का समय बचेगा और ज्यादा मामलों पर सुनवाई की जा सकेगी।
नए एसओपी पर एडवोकेट मुरारी तिवारी ने कहा, “यह सुप्रीम कोर्ट का एक अच्छा कदम और निर्देश है। इसका कारण यह है कि कुछ सीनियर वकील एक ही मामले पर घंटों, और यहां तक कि हफ्ते भी लगा देते हैं। यह एक इनडायरेक्ट मैसेज है कि एक केस पर ज्यादा समय लगाने के बजाय दूसरे मामलों पर भी ध्यान देना चाहिए। मैं सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की तारीफ करता हूं।”
लिखित सबमिशन जरूरी
सुप्रीम कोर्ट की नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) मौखिक बहस के लिए समय सीमा निर्धारित करती है। यह एसओपी पोस्ट-नोटिस और नियमित सुनवाई वाले मामलों पर लागू होती है, जिसमें वकीलों को अपनी मौखिक प्रस्तुतियों के लिए पहले से समय बताना पड़ता है और छोटी लिखित सबमिशन (अधिकतम 5 पेज) जमा करनी पड़ती है।
सुप्रीम कोर्ट के नए फैसले से क्या फायदा होगा?
- सुप्रीम कोर्ट के नए फैसले से समय की बचत होगी। वकीलों को अपनी बहस के लिए पहले से समय तय करना होगा, जिससे वे अपनी तैयारी को अधिक केंद्रित रख सकेंगे और अनावश्यक देरी से बच सकेंगे। इससे उनका कुल समय अधिक कुशलता से उपयोग होगा।
- इससे न्याय प्रक्रिया भी तेज होगी। अधिक मामले रोजाना सुनाए जा सकेंगे, जिससे वकीलों के क्लाइंट्स को जल्दी फैसले मिलेंगे और बैकलॉग कम होगा।
- समय का समान वितरण होगा, जिससे कोई एक वकील ज्यादा समय नहीं ले सकेगा, और सभी वकीलों को उचित मौका मिलेगा। इससे प्रतिस्पर्धा अधिक निष्पक्ष बनेगी।
- बेंच पहले से सुनवाई की योजना बना सकेंगी, जिससे वकीलों को अनिश्चितता कम होगी और वे अन्य मामलों पर फोकस कर सकेंगे।
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