
सांकेतिक तस्वीर
हैदराबादः तेलंगाना के हैदराबाद में स्ट्रे डॉग्स के अडॉप्शन और रिहैबिलिटेशन के लिए काम करने वाले एक NGO असोसिएशन फ़ॉर एनिमल शेल्टर एंड रेस्क्यू ऐड यानी AASRA ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन की आड़ में स्ट्रे डॉग्स के साथ की जा रही बर्बरता के मुद्दे को बड़े जोर शोर से उठाया है। NGO की फाउंडर गौरी वंदना और उनके सहयोगी हनुमंत राव ने हैदराबाद के बर्थ कंट्रोल सेंटर में स्ट्रे डॉग्स के साथ किये जा रहे ट्रीटमेंट को सुबूतों के साथ तेलंगाना हाई कोर्ट के समक्ष पेश किया। इसके बाद हाई कोर्ट ने स्ट्रे डॉग्स की धरपकड़ पर सशर्त रोक लगा दी।
स्ट्रे डॉग्स के साथ क्रूरता बर्दाश्त नहीं
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के लागू करने की दिशा में स्ट्रे डॉग्स के साथ महकमा बदसुलूकी नहीं कर सकता। पहले इनकी गणना…इस काम को तय मानकों के साथ अंजाम देने के लिए एक नोडल ऑफिसर की नियुक्ति और पर्याप्त शेल्टर होम की सुविधा के बाद ही स्ट्रे डॉग्स के रिलोकेशन का काम होगा।
हाई कोर्ट ने NGO को इस बात की अनुमति भी दी कि इस सारी प्रक्रिया का पालन सही तरीके से हो रहा है अथवा नहीं। इसकी जांच का अधिकार आसरा के पास होगा वे वहां जाकर फ़ोटो या वीडियो बना सकते हैं।
NGO ने कही ये बातें
आसरा के एनिमल क्रुएलिटी ऑफिसर हनुमन्त राव के कहा कि अम्बरपेट में बने एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर में स्ट्रे डॉग्स के साथ बर्बरता की जाती है। ये एसोसिएशन स्ट्रे डॉग्स को डिग्निटी के साथ रीलोकेट करने की लड़ाई लड़ रहा है। आसरा NGO रेस्क्यू किए गए जानवरों को एडॉप्शन और फोस्टर प्रोग्राम के जरिये उन्हें पक्के शेल्टर दिलाने की दिशा में कार्यरत है।
AASRA जानवरों पर होने वाली क्रूरता, ज़िम्मेदार पेट ओनरशिप और जानवरों की भलाई के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए प्रतिबद्ध है। एजुकेशनल प्रोग्राम और कम्युनिटी आउटरीच के ज़रिए ये NGO जानवरों के लिए लोगों दया और सम्मान की भावना को लेकर जागरुकता अभियान भी चला रहा है।
रिपोर्ट- वीजे वेंकटेश





































