
विदेश सचिव विक्रम मिस्री
रायसीना डायलॉग 2026 में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने शेयर्ड वैल्यूज के प्रिंसिपल और नियम आधारित व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि शेयर्ड वैल्यूज के प्रिंसिपल से आगे बढ़ने का समय आ चुका है। वहीं, नियम आधारित व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि अगर नियम हालात के हिसाब नहीं बदलते हैं तो बेकार हो जाते हैं। विक्रम मिस्री ने कहा कि हमें शेयर्ड वैल्यूज के प्रिंसिपल से आगे बढ़ना होगा। यह जरूरी तो है, लेकिन लंबे समय तक चलने वाले संबंध बनाने के लिए काफी नहीं है। आने वाले समय में हम एक डोमेन में प्रतिस्पर्धा करते हुए दूसरे में कोऑपरेट कर सकते हैं।
विदेश सचिव ने कहा, “भारत को नियम-आधारित व्यवस्था से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन क्या उन नियमों को बनाने में हमारा हाथ था? अगर नियम बदलते हालात के हिसाब से नहीं बदलते और ढल नहीं पाते, तो उनके बेकार हो जाने का खतरा है।”
बदल रही जियोपॉलिटिक्स
कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर भी इस संवाद का हिस्सा बने। इस दौरान उन्होंने कहा, “दो बड़ी ताकतों की जियोपॉलिटिक्स को लेकर चिंता बढ़ रही है, जो बिना किसी झिझक के कॉम्पिटिटिव पॉलिसी अपना रही हैं। क्या बीच की ताकतें इन मुद्दों से निपटने में आगे आ सकती हैं? हाल के दिनों में अमेरिका ने कनाडा की संप्रभुता के लिए चुनौतियां खड़ी की हैं। दुनिया वैल्यू-बेस्ड डिप्लोमेसी से रियलपॉलिटिक और इंटरेस्ट-ड्रिवन पॉलिसी की ओर बढ़ रही है, जहां डेमोक्रेसी और आइडियल तेजी से सिक्योरिटी और इकोनॉमिक प्रायोरिटी के आगे पीछे जा रहे हैं।”
कैसा होगा भविष्य के सहयोग का ढांचा
एनालिस्ट कंफर्ट इरो ने कहा कि हमें इस बात पर गंभीरता से सोचना होगा कि नया न्यू डील मोमेंट कैसा दिखना चाहिए और भविष्य के सहयोग का ढांचा कैसे बनेगा। भारत और कनाडा ने पहले ही कीमती संकेत दे दिए हैं। रूल बनाने वाले अब रूल तोड़ने वाले बन गए हैं, जिससे दूसरे देशों को अपनी संप्रभु विकल्प को आगे बढ़ाने का मौका मिल रहा है। फिर भी, जब वे उन चॉइस को सेफ नहीं रख पाते, तो उनके आस-पास के रूल्स की वैल्यू और लेजिटिमेसी पक्की नहीं रहती। एक एजेंसी का होना बहुत जरूरी है।
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