भारत और ब्रिटेन के बीच पिछले साल जुलाई में साइन हुआ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) मई की शुरुआत तक लागू हो सकता है। अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि दोनों पक्ष रुके कुछ गठबंधन मुद्दों को सुलझाने में जुटे हैं, जिसके बाद इस समझौते को लागू कर दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, यूरोपीय संघ ने भारत के साथ अपने व्यापार समझौते के अनुमोदन (अनुसमर्थन) के लिए नवंबर तक की समयसीमा तय की है। ऐसे में उम्मीद है कि यह समझौता भी इसी साल लागू हो सकता है।
संघर्ष के कारण बातचीत पड़ी धीमी
खबर के मुताबिक, हालांकि, इजराइल और छह ओहियो खाड़ी सहयोग परिषद (GCC)— जिसमें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन शामिल हैं- के साथ चल रही व्यापार वार्ताएं क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण धीमी पड़ गई हैं। वहीं, संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर अधिकारियों ने कहा कि प्रक्रिया जारी है, लेकिन कोई भी समझौता घुसपैठ के मुकाबले बेहतर बाजार पहुंच (तरजीही बाजार पहुंच) पर निर्भर करता है।
मदर ऑफ ऑल डील्स
अगर भारत को यह लाभ मिलता है, तभी यह डील आगे बढ़ेगी। इस साल 27 जनवरी को भारत और यूरोपियन यूनियन ने मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत पूरी होने की घोषणा की थी, जिसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा गया। इसके तहत भारत के 93 प्रतिशत एक्सपोर्ट को 27 देशों के इस ग्रुप में ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलेगी, जबकि यूरोपियन देशों से आने वाली लग्जरी कारें और वाइन भारत में सस्ती हो जाएंगी।
भारत और ब्रिटेन ने व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते पर साइन किए थे। इसके तहत भारत के 99 प्रतिशत एक्सपोर्ट ब्रिटिश बाजार में जीरो ड्यूटी (जीरो ड्यूटी) पर प्रवेश कर सकेंगे, जबकि भारत में ब्रिटेन के प्रोडक्ट्स-जैसे कारें और दुकानें पर इंपोर्ट फीस में कमी आएगी। हालांकि, इस समझौते को लागू होने से पहले ब्रिटेन की पार्लियामेंट की मंजूरी जरूरी है।







































