अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के और तेज होने और वैश्विक संकेतों के बीच घरेलू शेयर बाजार सोमवार को तेज गिरावट के साथ खुले। सुबह 9 बजकर 15 मिनट पर एक समय बीएसई सेंसेक्स 1316.76 अंक लुढ़ककर 73,216.20 के लेवल पर कारोबार करता दिखा। इसी तरह, एनएसई निफ्टी50 भी 420.30 अंक टूटकर 22,694.20 के लेवल पर आ गया। निफ्टी50 17 अप्रैल 2025 के बाद पहली बार 23,000 के नीचे फिसल गया। निफ्टी पर हिंडाल्को, टाटा स्टील, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, महिंद्रा एंड महिंद्रा और एचडीएफसी बैंक जैसे दिग्गज शेयर प्रमुख गिरावट वाले स्टॉक्स में शामिल हैं। वहीं, दूसरी ओर मैक्स हेल्थकेयर और ओएनजीसी के रिकवरी में बढ़त देखने को मिल रही है।
सभी सेक्टर लाल निशान में
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो सभी सेक्टर लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं। ऑटो, मीडिया, बैंकिंग, मेटल और पीएसयू बैंक इंडेक्स में करीब 2% तक की गिरावट दर्ज की जा रही है। इसके अलावा, मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी भारी बिकवाली देखने को मिल रही है। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स 2% से ज्यादा घटकर कारोबार कर रहे हैं, जिससे बाजार में कमजोरी का माहौल साफ नजर आ रहा है।
सोमवार को शुरुआती सत्र के दौरान बीएसई सेंसेक्स में शामिल कंपनियों का प्रदर्शन।
बाजार में भारी गिरावट के बड़े कारण
कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार सुबह के शुरुआती कारोबार में मामूली उतार-चढ़ाव देखा गया। ब्रेंट क्रूड 0.66% गिरकर 111.45 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 0.08% की हल्की गिरावट के साथ 98.16 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
भू-राजनीतिक टेंशन
वैश्विक सेंसेक्स पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर साफ नजर आ रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान 48 घंटे के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह नहीं खोलता है, तो अमेरिका उसके पावर प्लांट्स को तबाह कर देगा। जवाब में ईरान ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि अगर अमेरिका कोई सैन्य कार्रवाई करता है, तो वह खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा परिवेश और पानी शोधन संयंत्र को बर्बाद कर सकता है।
सोमवार को शुरुआती सत्र के दौरान एनएसई निफ्टी में शामिल कंपनियों का प्रदर्शन।
एशियाई सेंसेक्स में भारी गिरावट
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चौथे हफ्ते में पहुंचने के साथ एशिया-प्रशांत सेंसेक्स में भारी गिरावट देखी गई। जापान और दक्षिण कोरिया के प्रमुख इंडेक्स 5% से ज़्यादा टूट गए, जिससे जापान में घबराहट का माहौल बना हुआ है।
अमेरिकी बाजार पर भी दबाव
अमेरिकी बाज़ार पर भी इस तनाव का असर दिख रहा है। अमेरिकी फ्यूचर्स लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज फ्यूचर्स लगभग सपाट स्तर पर हैं, जबकि एसएंडपी 500 फ्यूचर्स 0.1% और नैस्डैक-100 फ्यूचर्स 0.2% तक गिर गए हैं।
रुपया 94 पैसे लुढ़ककर 94 के करीब
सोमवार को शुरुआती कारोबार में रुपये में गिरावट जारी रही; यह 41 पैसे गिरकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.94 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। इसकी वजह यह रही कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं और अमेरिकी डॉलर मज़बूत रहा। फॉरेक्स ट्रेडर्स ने बताया कि विदेशी फंड के लगातार बाहर जाने और सुबह के सत्र में घरेलू शेयर बाजारों में आई भारी गिरावट ने स्थानीय मुद्रा को और कमजोर कर दिया।
इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज में, स्थानीय मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.84 पर खुली, जिसके बाद यह और गिरकर अपने रिकॉर्ड निचले स्तर 93.94 पर पहुंच गई; यह अपने पिछले बंद भाव से 41 पैसे नीचे थी। शुक्रवार को रुपया पहली बार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93 के स्तर को पार कर गया था और 64 पैसे की भारी गिरावट के साथ अंततः 93.53 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ था।





































