भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। केंद्र सरकार ने रोहित जैन को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का नया डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया है। रोहित जैन की यह नियुक्ति 3 मई, 2026 से प्रभावी होगी और वे अगले तीन वर्षों तक इस पद पर अपनी सेवाएं देंगे। वे टी रबी शंकर का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल शनिवार को समाप्त हो गया है।
रोहित जैन बैंकिंग और मैनेजमेंट के क्षेत्र में कोई नया नाम नहीं हैं। उनके पास इस क्षेत्र का लगभग 30 साल का लंबा अनुभव है। वह वर्तमान में आरबीआई में ही कार्यकारी निदेशक के पद पर तैनात थे। बतौर कार्यकारी निदेशक, उन्होंने रिस्क मैनेजमेंट और बैंकों की कमियों को दूर करने वाले महत्वपूर्ण विभागों का कुशलतापूर्वक संचालन किया है। उनकी शैक्षिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कॉमर्स में मास्टर डिग्री और एमबीए (MBA) किया है। इसके अलावा, उनके पास बैंकिंग और रिस्क मैनेजमेंट से जुड़े कई अंतरराष्ट्रीय सर्टिफिकेट्स भी हैं, जो उन्हें इस पद के लिए एक योग्य उम्मीदवार बनाते हैं।
कड़ी चयन प्रक्रिया के बाद मिली जिम्मेदारी
आरबीआई के डिप्टी गवर्नर का पद बेहद जिम्मेदारी भरा होता है। पिछले महीने इस प्रतिष्ठित पद के लिए चार दिग्गजों का इंटरव्यू हुआ था। बैंकिंग की बारीकियों और भविष्य की चुनौतियों को गहराई से समझने वाले रोहित जैन ने इस इंटरव्यू में बाजी मारी और मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने उनके नाम पर मुहर लगा दी। हालांकि, उन्हें कौन सा विभाग सौंपा जाएगा, इसकी घोषणा होना अभी बाकी है।
क्या कहते हैं आरबीआई के नियम?
आरबीआई अधिनियम, 1934 के अनुसार, केंद्रीय बैंक में कुल चार डिप्टी गवर्नर होने चाहिए। दो डिप्टी गवर्नर बैंक के भीतर से होने चाहिए। एक कमर्शियल बैंकर होना चाहिए। एक अर्थशास्त्री होना चाहिए, जो मौद्रिक नीति विभाग का प्रमुख हो। रोहित जैन के अलावा बैंक के अन्य तीन डिप्टी गवर्नर स्वामिनाथन जे., पूनम गुप्ता और एस.सी. मुर्मू हैं।
टी रबी शंकर की लेंगे जगह
रोहित जैन वरिष्ठ बैंकर टी रबी शंकर का स्थान ले रहे हैं। टी रबी शंकर को पहली बार 2021 में नियुक्त किया गया था और उन्हें 2024 व 2025 में सेवा विस्तार भी दिया गया था। अब उनकी जगह रोहित जैन आरबीआई की नई टीम का हिस्सा बनकर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाएंगे।





































