लेह: लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने भारत सरकार के महत्वाकांक्षी वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (VVP) के तहत भारत-चीन सीमा पर स्थित चुमुर में लद्दाख से पहले मॉडल बॉर्डर विलेज की आधारशिला रखी। 16 हजार 700 फीट की ऊंचाई पर भारत-चीन सीमा के निकट स्थित चुमुर गांव में वर्तमान में 24 परिवार और 91 लोग रहते हैं, जिनकी आजीविका मुख्य रूप से पश्मीना पालन और उत्पादन पर आधारित है। यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत और आत्मनिर्भर सीमा गांवों के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
चार प्रमुख स्तंभों पर होगा विकास
बता दें कि पहले चरण में चुमुर सहित 10 सीमा गांवों को मॉडल बॉर्डर विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। चुमुर मॉडल बॉर्डर विलेज परियोजना चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है-
- बुनियादी ढांचा विकास
- रोजगार एवं आजीविका सृजन
- हर मौसम में कार्यशीलता
- नागरिक-सुरक्षा बल एकीकरण
इस परियोजना का उद्देश्य चुमुर को आत्मनिर्भर, जलवायु-अनुकूल, पर्यटन आधारित और आर्थिक रूप से सशक्त सीमा बस्ती के रूप में विकसित करना है।
हर परिवार को मिलेगा आधुनिक आवास
योजना के तहत गांव के प्रत्येक परिवार को दक्षिण दिशा की ओर बने पैसिव सोलर हाउस उपलब्ध कराए जाएंगे, जो सर्दियों में अधिकतम सूर्य ऊर्जा पाएंगे और -35 डिग्री सेल्सियस तक गिरने वाले तापमान से सुरक्षा देंगे। हर परिवार को मिलेगा-
- संलग्न शौचालय वाला आवास
- होमस्टे संचालन के लिए अतिरिक्त कमरा
- किचन गार्डन के लिए भूमि
- भेड़-बकरी शेड
- पशुओं के चारे के लिए भंडारण सुविधा
बता दें कि मौसम अनुकूल रहने पर इन आवासों का निर्माण सितंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
पर्यटन और पश्मीना उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
चुमुर को कोरजोक-हनले पर्यटन सर्किट का प्रमुख केंद्र बनाया जाएगा। इसके तहत-
- सामुदायिक कैफे की स्थापना
- स्थानीय हस्तशिल्प को बढ़ावा
- पश्मीना आधारित उद्योगों का विकास
- वैल्यू एडेड पश्मीना उत्पादों का निर्माण
जैसी पहलें की जाएंगी, जिससे स्थानीय लोगों के लिए आय के नए स्रोत तैयार होंगे और सीमा क्षेत्रों से पलायन को रोकने में मदद मिलेगी।
सालभर सब्जी के उत्पादन के लिए बनेगा आधुनिक ग्रीनहाउस
खाद्य सुरक्षा और रोजगार को मजबूत करने के लिए Defence Institute of High Altitude Research (DIHAR) के सहयोग से 90×27 फीट का व्यावसायिक ग्रीनहाउस स्थापित किया जाएगा। यहां सालभर सब्जियों का उत्पादन होगा, जिसकी आपूर्ति स्थानीय जरूरतों के अलावा भारतीय सेना और Indo-Tibetan Border Police जैसी सुरक्षा एजेंसियों को भी की जाएगी।
बनेगा हर मौसम में रहने योग्य गांव
परियोजना के तहत, चुमुर को एक पूर्ण विकसित ऑल-वेदर सेटलमेंट बनाया जाएगा, जिसमें-
- सालभर जल आपूर्ति
- सौर ऊर्जा आधारित बिजली व्यवस्था
- आधुनिक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन
- डिजिटल कनेक्टिविटी
कठोर सर्दियों में बेहतर रहने की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
गांव में विकसित होगा केंद्रीय सेवा केंद्र
गांव में एक केंद्रीय सेवा केंद्र विकसित किया जाएगा, जिसमें शामिल होंगे-
- स्कूल
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC)
- सामुदायिक भवन
- पार्क
- सामुदायिक कैफे
- टूरिस्ट इंटरप्रिटेशन सेंटर (TIC)
सेना और स्थानीय लोगों की भूमिका अहम
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि यह केवल विकास परियोजना नहीं बल्कि सीमा क्षेत्रों को मजबूत करने, राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने और स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने की दिशा में एक परिवर्तनकारी पहल है। उन्होंने भारतीय सेना, आईटीबीपी, स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि चुमुर मॉडल बॉर्डर विलेज भविष्य में देश के अन्य उच्च हिमालयी सीमा क्षेत्रों के लिए भी एक आदर्श मॉडल बनेगा।
चुमुर मॉडल बॉर्डर विलेज की प्रमुख विशेषताएं
- लद्दाख का पहला मॉडल बॉर्डर विलेज
- भारत के अग्रणी सीमा गांव विकास मॉडलों में शामिल
- स्थाई और जलवायु-अनुकूल सीमा बस्ती का विकास
- पर्यटन एवं रोजगार के नए अवसर
- आधुनिक आवास और पशुपालन सुविधाएं
- सामुदायिक कैफे और होमस्टे आधारित पर्यटन
- सौर ऊर्जा आधारित बुनियादी ढांचा
- सेना और स्थानीय समुदाय के बीच मजबूत सहयोग
- शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन सुविधाओं से युक्त केंद्रीय सेवा केंद्र
- सीमा क्षेत्रों से पलायन रोकने और आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर विशेष जोर
यह परियोजना लद्दाख के सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का नया अध्याय लिखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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