भारतीय शेयर बाजार के लिए एक और झटका देने वाली खबर सामने आई है। पहले ताइवान और अब दक्षिण कोरिया ने भी भारत को पीछे छोड़ दिया है। इसके साथ ही भारत दुनिया के सबसे बड़े शेयर बाजारों की सूची में सातवें स्थान पर पहुंच गया है। लगातार गिरते बाजार, महंगे कच्चे तेल और वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय बाजार दबाव में नजर आ रहा है।
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक दक्षिण कोरिया की लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन बढ़कर 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं भारतीय शेयर बाजार का कुल मार्केट कैप घटकर 4.8 ट्रिलियन डॉलर रह गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों में तेज निवेश ने कोरियाई बाजार को जबरदस्त बढ़त दिलाई है।
AI बूम से चमके कोरियाई शेयर
दक्षिण कोरिया की बड़ी टेक कंपनियां, खासकर सेमीकंडक्टर सेक्टर की दिग्गज कंपनियां इस तेजी की मुख्य वजह बनी हैं। AI टेक्नोलॉजी की बढ़ती मांग ने वहां के शेयर बाजार को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। इसी तरह ताइवान को भी उसकी टेक कंपनियों से बड़ा फायदा मिला है।
भारत क्यों पिछड़ रहा है?
भारत का बाजार इस साल कमजोर प्रदर्शन कर रहा है। विदेशी निवेशकों की सतर्कता, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता ने बाजार पर दबाव बढ़ाया है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंची तेल कीमतें भारत की आर्थिक वृद्धि, महंगाई और चालू खाते के घाटे पर असर डाल सकती हैं। यही वजह है कि भारतीय शेयर बाजार इस साल अब तक करीब 11% कमजोर रहा है।
मानसून और कमाई पर भी नजर
भारतीय मौसम विभाग (IMD) द्वारा सामान्य से कम बारिश की संभावना जताने के बाद बाजार की चिंता और बढ़ गई है। कमजोर मानसून का असर कृषि, खपत और कंपनियों की कमाई पर पड़ सकता है।







































