अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी के मामले में कई खुलासे हुए। पता लगा कि मंदिर में सारी व्यवस्था राम भरोसे चल रही थी। दानपत्र खुलने से लेकर, चढ़ावे की रकम की गिनती और नोटों के बंडल बैंक तक पहुंचाने तक, हर कदम पर चोरी हुई। CCTV कैमरे थे, निगरानी करने वाले भी तैनात थे, गिनती के नियम-कायदे भी तय थे लेकिन गिनती के वक्त CCTV बीच-बीच में ऑफ किए गए। निगरानी करने वालों ने आंखे फेर लीं। नियम कायदे ताक पर रख दिए गए और चढ़ावा चोरी करने वाले मज़े से अपना काम करते रहे।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रामभक्त सिर्फ पन्द्रह दिन सब्र रखें, तब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा, महापाप करने वाला कोई भी, कितना भी बड़ा हो, बचेगा नहीं, सबका हिसाब होगा। योगी ने अच्छा किया कि जब वो राम मंदिर गए तो उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को दूर रखा। अगर वह चंपत राय से मिलते तो लोग कहते कि उनको बचाने की कोशिश हो रही है, हालांकि आंच अभी चंपत राय तक नहीं पहुंची है। शुरुआती जांच में इस बात के सबूत तो मिले हैं कि राम मंदिर में भक्तों ने जो रुपये चढ़ाए थे, उनकी चोरी किस-किसने की।
मंदिर में चढ़ाए गए सोने-चांदी और हीरों के जेवरात को किसने गायब किया। कुछ माल पकड़ा गया है। कुछ कैश बरामद हुआ है। कुछ लोगों की संपत्ति भी पहचान में आई है लेकिन भगवान के मंदिर में डकैती किस स्तर की थी, इसका पूरा अंदाज़ा लगना अभी बाकी है। गिनती की प्रक्रिया में जो 44 लोग शामिल थे, उनमें से कई चेहरों की पहचान हुई है लेकिन ये पाप इतनी बेशर्मी से और इतना खुलेआम हो रहा था कि गिनती के काम से जुड़े एक-एक व्यक्ति को इसकी जानकारी थी। इसलिए सब के सब गुनहगार हैं।
इस बात के भी प्रमाण मिले हैं कि गिनती में ऐसे लोगों को लगाया गया, जो RSS से जुड़े थे, सिर्फ पर्ची पर नियुक्त कर दिए गए। नियुक्त करने से पहले किसी की कोई पड़ताल नहीं हुई। गिनती के समय सतर्कता शून्य थी। मंदिर में तैनात पुलिस वालों को गिनती करने वालों की जामातलाशी करने से रोका गया। मामला सामने तब आया जब गिनती करने वालों के पास अचानक iPhone दिखाई देने लगे। उन्होंने कई गाड़ियां खरीद ली, किसी ने मकान बना लिया, किसी ने दुकान खरीद ली।
यहां दाल में काला नहीं था। पूरी की पूरी दाल ही काली थी। इन पापियों ने करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं का अपमान किया है, सनातन के साथ विश्वासघात किया है। इन सब पापियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए, जो दुनिया के सामने उदाहरण बने।
NEET परीक्षा: अगले साल से फूलप्रूफ सिस्टम बनाएं
कल रविवार को NEET-UG की परीक्षा देश भर में दुबारा होगी। दिल्ली हाईकोर्ट ने कह दिया कि रीएक्जाम खत्म होने तक टेलीग्राम एप्प पर बैन जारी रहेगा, सरकार का ये फैसला बिल्कुल सही है। सरकार इस बार बहुत सतर्क है। हर राज्य में साइबर एक्सपर्ट्स की टीमें लगाई गई हैं जो लगातार उन सोशल मीडिया अकाउंट्स पर नजर रख रही हैं। पेपर लीक करने वाले माफिया गिरोहों का जाल इतना खतरनाक है कि पेपर सुरक्षित पहुंचाने के लिए भारतीय वायु सेना की सहायता लेनी पड़ी। पेपर बनाने वालों को कमरे में बंद रखना पड़ा।
अफवाहें न फैले, फर्जी पेपर पोस्ट न हो सके, इसलिए टेलीग्राम को बैन करना पड़ा। परीक्षा में cheating न हो, इसके लिए मेडिकल छात्रों की छुट्टियां रद्द करनी पड़ी ताकि कोई छात्र नकल न कर सके। इस तरह के फैसले इमरजेंसी में लिए जाते हैं। मैं मानता हूं कि ये धर्मेंद्र प्रधान के लिए इमरजेंसी है। ये रीएक्ज़ाम उनका सबसे बड़ा इम्तिहान है, लेकिन ऐसे एक्शन बार-बार नहीं लिए जा सकते। इसलिए इस इम्तिहान के बाद एक फूलप्रूफ सिस्टम बनाने की कोशिश होनी चाहिए जिससे पेपर लीक, परीक्षा में cheating को रोका जा सके और 22 लाख छात्रों को level playing field मिले।
ममता: बिछड़े सभी बारी बारी
तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की और अपने 20 बागी सांसदों की सदस्यता खत्म करने की अर्जी दी। ये 20 बागी सांसद नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हो गए हैं। अभिषेक बनर्जी पिछले पांच दिन से कोलकाता में रोज़ ED या CID के सवालों का सामना कर रहे हैं। अभिषेक ने कहा कि बीजेपी सारी क्षेत्रीय विरोधी पार्टियों को खत्म करना चाहती है। शुक्रवार को ममता बनर्जी के दो पुराने साथी, पांच बार विधायक ज्योतिप्रिय मल्लिक और सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर गौतम देब ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
ये देखकर आश्चर्य होता है, किस तरह से तृणमूल कांग्रेस के छोटे-बड़े नेता पार्टी छोड़ रहे हैं। एक तरह से पार्टी से निकलने की होड़ मची हुई है। अभिषेक बनर्जी ED-CBI के बारे में चाहे जो कह लें, लोकसभा स्पीकर के सामने चाहे कितनी अर्जी फाइल कर दें, महुआ मोईत्रा सोशल मीडिया पर चाहें कितनी भी कहानियां सुना लें, कुछ बदलने वाला नहीं है। TMC के 20 सांसद दूसरी पार्टी में जा चुके हैं। वो NDA के साथ जाएंगे। अन्य क्षेत्रीय पार्टियां भी टूटेंगी। NDA को delimitation वाला संविधान संशोधन बिल पास कराने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत चाहिए। उसका इंतजाम किया जा रहा है और ये कोई सीक्रेट नहीं है। (रजत शर्मा)
देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 19 जून, 2026 का पूरा एपिसोड







































