राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर्वोच्च नेतृत्व ने ये फैसला कर लिया है कि चंपत राय को राम मंदिर परिसर से हटा दिया जाय, उन्हें अयोध्या से मीलों दूर कोई नई जिम्मेदारी दी जाएगी। चंपत राय की तरफ से ये तर्क दिया गया था कि उनके हटाए जाने से मंदिर परिसर में सारी व्यवस्था लड़खड़ा जाएगी लेकिन RSS के बड़े नेताओं ने वैकल्पिक व्यवस्था कर ली है।
पहले चंपत राय और अनिल मिश्रा को इस्तीफा देने को कहा गया, फिर उनके स्थान पर दो नये नाम तय कर लिए गए हैं, निर्णय हो चुका, इसका ऐलान 6 जुलाई को ट्रस्ट की बैठक के बाद किया जाएगा। ट्रस्ट से पूरी तरह छुट्टी के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा पर भी शिंकजा कसेगा। पुलिस चंपत राय का बयान दर्ज कर चुकी है, अब अनिल मिश्रा और गोपाल राव से पूछताछ होगी।
RSS के सरसंघचालक मोहन भागवत ने स्वयंसेवकों को नसीहत दी है, कहा है कि अहंकार बड़े-बड़ों को ले डूबता है, अहंकारी व्यक्ति अपना भी नुकसान करता है और संगठन की भी बदनामी करवाता है। उनका इशारा किस ओर था, यह बताने की आवश्यकता नहीं है।
चंपत राय को लेकर जिस तरह की रिपोर्टिंग हो रही है, उससे RSSऔर VHP के कुछ लोग नाराज़ हैं। उनका कहना है कि चंपत राय ने 35 साल समाज की सेवा की, मंदिर के लिए जीवन खपा दिया। लेकिन इन पैरोकारों को ये भी बताना चाहिए कि जैसे-जैसे रामलला का मंदिर बनता गया, वैसे-वैसे चंपत राय बदलते गए। उन्होंने राम मंदिर को अपना शोरूम बना लिया, मंदिर के प्रबंधन पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए किसी को अंदर पैर नहीं रखने दिया। ताला, चाबी, हिसाब-किताब, साफ-सफाई सब अपने कब्जे में रखा। सबको पता है कि चंपत राय को अहंकार हो गया था। सबने देखा कि चंपत राय बात-बात पर चिल्लाने लगते थे।
डेढ़ साल से RSS का सर्वोच्च नेतृत्व उनसे कुछ professionals को नियुक्त करने की बात कह रहा था पर चंपत राय टालते रहे, ज़िद पर अड़े रहे। एक CEO का नाम फाइनल हो गया था। चंपत राय ने ये कहकर नियुक्ति रोक दी कि एक बार नानाजी देशमुख ने चित्रकूट में इस व्यक्ति नियुक्ति को रोक दिया था।
जब दान में चोरी का मामला खुला, तो भी चंपत राय ने किसी को जांच में शामिल नहीं किया। वह खुद पुलिस, खुद जांचकर्ता, और खुद अदालत बनकर चुराए गए माल की रिकवरी के लिए निकल पड़े, इसे छोटी-मोटी चोरी का नाम देकर लीपापोती करने की कोशिश की।
दुनिया भर में प्रभु राम के भक्तों को चोट पहुंचाने वाले चंपत राय की इन हरकतों का कैसे बचाव किया जा सकता है? क्या राम मंदिर को शोरुम बनाकर लूट का तमाशा देखने वाले को राम मंदिर से हमेशा के लिए बाहर नहीं किया जाना चाहिए ?क्या एक व्यक्ति की ज़िद और अहंकार के कारण RSS जैसे संगठन की प्रतिष्ठा को दांव पर लगाया जा सकता है? रही बात सियासत की, अयोध्या में भगवान राम के मंदिर में चोरी से अखिलेश यादव को अच्छा खासा मुद्दा मिल गया है लेकिन उनकी मजबूरी ये है कि ये मंदिर बाबरी मस्जिद को तोड़कर बनाया गया था। वो वहां जाएं तो कैसे जाएं?
योगी के लिए भी रामलला के मंदिर में दान की लूट एक बड़ी चुनौती है। इसीलिए योगी को ये सुनिश्चित करना होगा कि चोरी की रकम रिकवर हो, अभियुक्तों की प्रॉपर्टी पर भी बुलडोज़र चले, राम मंदिर के पापियों को कोर्ट से सजा मिले। योगी का अबतक का कीर्तिमान तो यही बताता है कि वह किसी को छोड़ेंगे नहीं।
दिल्ली सरकार की EV पॉलिसी : सही दिशा में कदम
दिल्ली सरकार ने नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति का ऐलान कर दिया। दिल्ली सरकार 15 हज़ार करोड़ रुपये खर्च करेगी। यह नीति कल 1 जुलाई से 31 मार्च 2030 तक लागू रहेगी। जो लोग 30 लाख रुपये तक की कीमत वाली EV गाड़ी खरीदेंगे, उन पर न रोड टैक्स लगेगा, न रजिस्ट्रेशन फीस देनी होगी। इलेक्ट्रिक स्कूटर या बाइक खरीदने पर तीस हजार रुपये तक की सब्सिडी मिलेगी। इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर खरीदने वालों को दिल्ली सरकार 50 हज़ार रुपये तक की सब्सिडी देगी। नई EV खरीदते वक्त अगर कोई अपनी पुरानी गाड़ी को स्क्रैप कराएगा तो उसे 1 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
दिल्ली सरकार ने ये भी ऐलान किया कि अगले साल 1 जनवरी से दिल्ली में पेट्रोल,डीजल या CNG से चलने वाले थ्री व्हीलर्स का रजिस्ट्रेशन बंद हो जाएगा, सिर्फ इलेक्ट्रिक थ्री व्हीलर्स का रजिस्ट्रेशन होगा। अप्रैल 2028 से दिल्ली में सिर्फ EV टू-व्हीलर बिकेंगे। EV cars को लेकर दिल्ली सरकार का फैसला अच्छा है।
प्रदूषण को कम करने के लिए EV vehicles के अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं है लेकिन लोग अभी भी EV कार खरीदने से डरते हैं। लोगों को लगता है कि लंबी यात्राओं में चार्जिंग स्टेशन्स की कमी है, EV cars की टेक्नोलॉजी, designs बहुत तेजी से बदलती है। मॉडल लेने के कुछ साल बाद ही वो outdated हो जाती हैं।
कई जगह EV technology को लेकर भी सवाल उठे हैं। बहुत सारे वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं, जहां electrical circuit में कोई भी खराबी हो तो पूरी गाड़ी बंद हो जाती है। इन गाड़ियों को ठीक करने के लिए trained मैकेनिक की भी कमी है। लेकिन मुझे लगता है कि जब भी कोई नई technology मार्केट में आती है तो इसी तरह की समस्याएं सामने आती हैं। लेकिन धीरे-धीरे इन खामियों को दूर करना और Electric Vehicles को पेट्रोल-डीजल कारों के मुकाबले सस्ता करना सही दिशा में एक कदम होगा। (रजत शर्मा)
देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 26 जून, 2026 का पूरा एपिसोड






































